
ग्वालियर. ग्वालियर-चंबल संभाग में यूं तो कई शिव मंदिर हैं, पर ग्वालियर शहर में बने अचलेश्वर मंदिर की बात ही कुछ और है। स्टेट के समय की अचल बाबा की इस पिंडी के दर्शन के लिए आम दिनों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है वहीं महाशिवरात्रि के साथ श्रावण मास में इनकी संख्या काफी बढ़ जाती है। सड़क के बीचों-बीच निकली अचलनाथ की पिंडी आज एक विशाल मंदिर और आस्था का केंद्र बन चुका है।
हाथी भी नहीं हटा पाए थे अचल बाबा को
मान्यता है कि करीब साढ़े तीन सौ साल पूर्व एक पेड़ काटने पर बीच मार्ग में शिवलिंग (पिंडी) प्रकट हुआ था। शिवलिंग बीच मार्ग स्थापित है। इसलिए तत्कालीन सिंधिया राजपरिवार ने इसे बीच रास्ते से किनारे स्थापित करने के लिए हटाने का प्रयास किया। मजदूरों के नहीं हटा पाने पर शिवलिंग को जंजीरों से बांधकर हाथियों से खिंचवाने का प्रयास किया गया, लेकिन शिवलिंग टस से मस नहीं हुआ। तब से इनका नाम अचलनाथ पड़ गया।
करोड़ों की लागत से तैयार हो रहा मंदिर
अचलेश्वर मंदिर के जीर्णोद्धार का काम जोर-शोर से जारी है। करीब 3 करोड़ 63 लाख की लागत से अचलेश्वर मंदिर को तैयार किया जा रहा है। यहां शिवरात्रि के पर्व पर एक लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहीं सावन के प्रत्येक सोमवार को भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
Published on:
16 Jul 2022 07:20 pm
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