
कमाल है...सरकारी जमीन अपनी बताकर 16 लाख में पंचायत सचिव को बेची
ग्वालियर. जडेरूआ में स्थित सरकारी जमीन अपनी बताकर 16 लाख रुपए में पंचायत सचिव को बेच दी। सचिव ने उस पर निर्माण शुरू किया तो नगर निगम अधिकारियों ने आकर तोड़ दिया, तब उन्हें पता चला कि जो जमीन खरीदी है वह सरकारी है। उन्होंने पैसे लौटाने के लिए कहा, लेकिन वह टालमटोल करता रहा। जब रकम वापस नहीं मिली तो पंचायत सचिव ने बुधवार रात को महाराजपुरा थाने में एफआइआर कराई।
पुलिस के मुताबिक दतिया निवासी पंचायत सचिव रामनरेश शर्मा को आदित्यपुरम निवासी संजय सिंह गुर्जर ने बताया कि उसकी जडेरूआ में जमीन है, जिसे वह बेचना चाहता है। पसंद आने पर रामनरेश ने पत्नी के नाम से 1500 वर्गफीट प्लॉट का सौदा कर संजय को 16 लाख रुपए दे दिए। वर्ष 2014 में जमीन की रजिस्ट्री भी करा ली। दिसंबर 2017 में उस प्लॉट पर मकान का निर्माण कार्य शुरू कर पिलर खड़े कर दिए, लेकिन नगर निगम ने आकर पिलर तोड़ दिए, पूछताछ की तो पता चला जमीन सरकारी है। इसके बाद संजय से पैसे वापस करने को कहा, लेकिन कुछ महीने वह टालमटोल करता रहा, बाद में पैसे देने से मना कर दिया, तब रामनरेश ने संजय पर चार सौ बीसी की एफआइआर कराई। रामनरेश का कहना है कि संजय खुद को सेना का जवान बताता है।
एक साल बाद हुई सुनवाई
रामनरेश ने बताया कि धोखाधड़ी का पता चलने पर उन्होंने भोपाल में डीजीपी की जनसुनवाई में शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। दोबारा फिर डीजीपी को आवेदन दिया, फिर भी रिपोर्ट नहीं लिखी गई। 5 दिसंबर 2018 को सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की, तब जाकर बुधवार को महाराजपुरा थाने में मामला दर्ज हुआ।
इन्होंने कहा
सरकारी जमीन को खुद की बताकर बेचा गया है, जिस पर चार सौ बीसी की एफआइआर दर्ज की गई। संजय को कई बार बुलाया, लेकिन वह आया नहीं।
राजेन्द्र वर्मन, टीआइ महाराजपुरा
आरोपी को कोर्ट ने दी जमानत
थाना प्रभारी चीनौर संजय बरैया को एक किलो गांजा जब्त करने की कार्यवाही को संदिग्ध पाते हुए एसपी ने निलंबित कर दिया उस मामले में आरोपी को एनडीपीएस कोर्ट ने जमानत पर रिहा किए जाने के आदेश दिए हैं। चीनौर निवासी राजबहादुर सिंह कुशवाह के खिलाफ चीनौर थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत 20 फरवरी 19 को मामला दर्ज किया गया था। कुशवाह के अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने एक विज्ञप्ति में बताया कि राजबहादुर सिंह के खिलाफ एक मंत्री के दबाव में मामला दर्ज किया गया है। भदौरिया का कहना था कि पडौसी से विवाद पर हुए मारपीट के मामले में कुछ लोगों को अदालत ने सजा सुनाई थी। जिसमें एक आरोपी मंत्री का प्रतिनिधि है, इसलिए उन्होंने थाना प्रभारी के जरिए राजबहादुर के खिलाफ मामला दर्ज कराया। इसकी शिकायत पर एसपी ने मामले की जांच कराई जिसमें राजबहादुर के खिलाफ दर्ज मामले को संदिग्ध पाते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया।
Published on:
01 Mar 2019 07:23 pm
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