
ग्वालियर। आज रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ग्वालियर के दौरे पर रहेंगे। आपको बता दें कि वह पहली बार ग्वालियर आ रहे हैं। यहां दौरे की तैयारियों की निगरानी केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संभाली हुई है। वे मिनिट टू मिनिट कार्यक्रम की समीक्षा कर अपडेट देख रहे हैं और निर्देश दे रहे हैं। शाह यहां राजमाता विजया राजे सिंधिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का शुभारम्भ करेंगे।
इस दौरान वे सिंधिया महल यानि जयविलास पैलेस में डेढ़ घंटे का समय भी बिताएंगे। इस बीच वे यहां भोजन भी करेंगे। यहां अमित शाह का शाही स्वागत किया जाएगा। यहां वे एक डॉक्युमेंट गैलरी का अवलोकन भी करेंगे। इस डॉक्युमेंट गैलरी में मराठों के शौर्य का प्रदर्शन किया गया है। आपको बता दें कि 400 कमरे वाले इस आलीशान जयविलास पैलेस की वर्तमान कीमत करीब 4 हजार करोड़ रुपए है। आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि महल की छत पर झूमर लगाने के लिए हाथियों की सहायता ली गई थी। ऐसे ही कुछ रोचक तथ्य जानने के लिए पढि़ए पूरी खबर...
देश के खूबसूरत महलों में से एक
जय विलास पैलेस देश के खूबसूरत महलों में गिना जाता है, जिसका निर्माण 1874 में जीवाजी राव सिंधिया ने करवाया था, उस समय इसकी कीमत 1 करोड़ रुपए से भी ज्यादा थी। वहीं इसकी कीमत को कई जानकार तत्कालीन 200 मिलियन डॉलर भी बताते हैं। इस महल का डिजाइन लेफ्टिनेंट कर्नल सर माइकल फिलोज द्वारा तैयार किया गया था। यह महल अब भी सिंधिया शाही परिवार के अधीन है। इस महल को बनाने में ब्रिटिश, भारतीय और इतावली शैली का प्रयोग किया गया है। यह महल बेहद खूबसूरत है, जो पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है।
प्रिंस एडवर्ड-7 के स्वागत में किया गया था निर्माण
यह एक विशाल महल है, जो 1,240,771 वर्ग फीट के क्षेत्र में फैला हुआ है। माना जाता है कि जिस वक्त इस महल का निर्माण किया गया था, तब इसकी कीमत 1 करोड़ रुपए थी, लेकिन आज इस विशाल और आकर्षक महल की कीमत अरबों में बताई जाती है। इस महल का निर्माण इंग्लैंड के प्रिंस एडवर्ड-7 के स्वागत में किया गया था। इस खूबसूरत महल को देखकर नहीं लगता कि इसका निर्माण केवल इसलिए किया गया हो कि किसी का स्वागत करना है। इस महल को फ्रांस के वर्साइल्स पैलेस की तरह बनाने का प्रयास किया गया था। महल को सजाने के लिए विदेश से कारीगरों को बुलवाया गया था।
हाथियों से आंकी गई थी छत की मजबूती
इस महल में एक विशाल झूमर लगा हुआ है, बहुत कम ही लोग जानते हैं कि इस विशाल झूमर का वजन 3500 किलोग्राम है। यह अपने आप में ही काफी अनोखा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि झूमर लगाने के लिए हाथियों की सहायता ली गई थी। दरअसल हाथियों का इस्तेमला छत की मजबूती जांचने के लिए किया गया था, जहां झूमर लगना था। इंजीनियरों ने छत पर 10 हाथियों को 7 दिन तक खड़ा करके रखा था, जिसके बाद ही इस छत पर 3500 किलो वजनी झूमर को टांगा गया था।
चांदी की ट्रेन लाती है भोजन
इस विशाल महल में एक बड़ा डाइनिंग हॉल है, जिसमें एक बार में कई लोग बैठ कर खाना खा सकते हैं। इस डाइनिंग हॉल का मुख्य आकर्षण चांदी की ट्रेन है, जिसका इस्तेमाल मेहमानों को भोजन परोसने के लिए किया जाता था। यह ट्रेन खाने के साथ-साथ मेहमानों का मनोरंजन भी करती थी। आज भी इस ट्रेन को यहां देखा जा सकता है।
महल में 400 कमरे
इस महल में कुल 400 कमरे हैं, जिनमें से 40 कमरों को संग्रहालय के रूप में तब्दील कर दिया गया है। बाकी हिस्सों में सिंधिया परिवार रहता है। इस संग्रहालय को जीवाजी राव सिंधिया म्यूजियम नाम दिया गया है। पर्यटक इस संग्रहालय का भ्रमण कर सकते हैं, और यहां मौजूद बेशकीमती वस्तुओं को भी देख सकते हैं। यह म्यूजियम बुधवार के दिन बंद रहता है। बाकी दिनों यह सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक खुला रहता है।
Published on:
16 Oct 2022 11:18 am
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
