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बर्थ डे स्पेशल- 75 के हुए अमिताभ, ग्वालियर और बिग बी के बीच है ये खास रिश्ता

इसी इतिहास को बनाऐं रखने और लोगों तक पहुंचाने के लिए सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने भी अपना योगदान दिया है। म.प्र राज्य पर्यटन विकास निगम ने 10 नवम्बर

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amitabh bachchan

ग्वालियर। ग्वालियर का नाम पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। ग्वालियर के प्रसिद्ध होने की कई वजह हैं। जिसमें शामिल है यहां का प्रेम, शौर्य, बलिदान, राजनीति, कूटनीति, इमारतें, किला व अन्य। ग्वालियर के किले को दुनिया में किलों का जिब्रालटर कहा जाता है। जिसका मतलब होता अभेद्य किला। यह किला जमीन से 300 मीटर की उंचाई पर बना हुआ है। जिस पर आक्रमण करना आसान नहीं रहा।

इस जानकारी के पीछे का कारण यह है कि 11 अक्टूबर 2017 को सदी के महानायक अपने जीवन के 75 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद में जन्में अमिताभ बच्चन विश्व विख्यात अभिनेता हैं। वर्तमान में उनका निवास स्थान मुम्बई है। अमिताभ का ग्वालियर से गहरा नाता है। जिसे कम लोग ही जानते हैं। आइए आप भी जानिए वो बात....

इसी इतिहास को बनाऐं रखने और लोगों तक पहुंचाने के लिए सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने भी अपना योगदान दिया है। म.प्र राज्य पर्यटन विकास निगम ने 10 नवम्बर 1989 को बीग बी की आवाज में ग्वालियर का इतिहास रिकार्ड कराया था। जिसमें ग्वालियर का सम्पूर्ण इतिहास है। महारजा सूरज सेन से लेकर सिंधिया तक सभी के कार्यकाल का वर्णन उस साउण्ड सिस्टम में अमिताभ की आवाज में रिकार्ड हैं। इसमें अमिताभ के अलावा कलाकार जलाल आगा, वीरेंद्र राजदान के साथ-साथ क्लासिकल संगीत में पं. भीमसेन जोशी, कुमार गंधर्व और जसराज की आवाज भी ग्वालियर का इतिहास बता रही है।

इसमें किले के मुख्य द्वार सहित चारों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। साथ ही अमिताभ की आवाज में ग्वालियर की स्वर्णिम गाथा संगीत के साथ सुनाई जा रही होती है। जिसे देखने और सुनने के लिए सैंकड़ों की संख्या मेंं लोग आज भी किले पर आते हैं। राजा मानसिंह और रानी मृगनयनी के प्रेम गाथाऐं भी हमेशा से प्रचलित रही हैं। ग्वालियर के किले पर की गई कारीगरी और नक्काशी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है साथ ही राजा मानसिंह के द्वारा रानी मृगनयनी के लिए बनाया गया गूजरी महल भी आश्चर्य चकित है।

स्पेशल- आजादी की लड़ाई तक इतिहास लाइट एंड साउंड शो में राजा सूरज सेन से लेकर आजादी की लड़ाई तक का इतिहास दर्शकों को दिखाया और सुनाया जाता है। रंग-बिरंगी लाइट्स किले की इमारतों पर डाली जाती हैं।