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नवंबर से पहले यहां जीत चाहती है कांग्रेस! दोनों दलों ने कस ली कमर

- जीत के लिए दोनों मुख्य प्रतिद्वंदी दलों ने कमर कस ली है

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ग्वालियर में विधानसभा चुनाव से पहले एक और बड़े चुनाव का आगाज होने जा रहा हैं, जिसमें जीत के लिए दोनों मुख्य प्रतिद्वंदी दलों ने कमर कस ली है। दरअसल अप्रैल में मुरार छावनी बोर्ड (ग्वालियर) के चुनाव होने हैं। ज्ञात हो कि छाबनी बोर्ड में सात वार्ड हैं और वहीं वर्तमान में यहां भाजपा का कब्जा है। वहीं इस संबंध में कमलनाथ ने स्थानीय नेताओं को साफ बता दिया है कि छाबनी बोर्ड पर कब्जे के साथ कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले जीत का खाता खोले।

कुछ ऐसी ही तैयारी भाजपा की ओर से भी देखने को मिल रही है। इस चुनाव को लेकर 24 मार्च तक नामांकन दाखिल करना है, ऐसे में दोनों दलों ने यहां प्रत्याशी चयन का सर्वे भी शुरू कर दिया है। छावनी के अधिकांश वार्ड ग्रामीण क्षेत्र में बसे हैं, इस आधार पर कमलनाथ ने देहात सदर प्रभूदयाल जोहरे को अहम जिम्मेदारी दे रखी है। वहीं अध्यक्ष बनने के बाद यह उनकी पहली चुनावी अग्निपरीक्षा होगी। वहीं कांग्रेस के एक अन्य नेता साहब सिंह गुर्जर यहां से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, ऐसे में वे छावनी बोर्ड चुनाव में भी विशेष दिलचस्पी ले रहे हैं।

कारण यह है कि इस क्षेत्र में आधी से ज्यादा आबादी एससी-ओबीसी तबके से है, जिसको देखते हुए बसपा की ओर से भी यहां विशेष संभावनाएं तलाशी जा रही है। अतीत में छावनी के राजनीतिक माहौल का देखें तो यह खून से भरा रहा है। जिसके चलते यहां कई पार्षदों को चुनावी रंजिश में अपनी जान तक गंवाना पड़ी है। यहां तक की यह डगर पुलिस और प्रशासन के लिए भी मुश्किल से भरी मानी जाती है।

असल तीसरी ताकत साबित करने की स्पर्धा
ज्ञात हो कि ग्वालियर-चंबल की सियासत में कभी 'फूल और हाथ के मुकाबले हाथी को तीसरी ताकत माना जाता था, लेकिन वहीं इस बार निगम चुनाव में झाड़ू तीसरी ताकत बनती दिखी। आप पार्टी के उम्मीदवारों ने जहां महापौर के पद पर खासे वोट बटोरे, वहीं तमाम वार्डों में आप पार्टी सीधे मुकाबले में भी डटी रही। ऐसे में यह स्थिति हाथी वालों के लिए चिंता बढ़ाने वाली रही। वहीं अब बसपा विधानसभा चुनाव से पहले अपने रहे-सहे जनाधार की हिफाजत में जुटी है।

ज्ञात हो कि कांशीराम की जयंती पर बसपा ने फूलबाग मैदान में बड़ा सम्मेलन कर यह दिखाने की कोशिश की कि वह नवंबर के समर में दो-दो हाथ करने के लिए तैयार है। वहीं भिंड के बसपा विधायक संजू कुशवाह के भाजपा में चले जाने से चंबल में हुए डैमेज की भरपाई के लिए भाजपा-कांग्रेस से कुछ असन्तुष्ट नेताओं को पार्टी में लाने का प्रयास किया जा रह्म है।

बताया जाता है कि सांसद रामजी गौतम और सूबा सदर पिप्पल ने लोकल लीडर्स को चुनाव तक का शुरुआती रोडमैप समझा दिया है। वहीं दूसरी ओर आप पार्टी के ग्वालियर चंबल के नेताओं ने भोपाल में केजरीवाल और भगवंत मान की रैली में भारी भीड़ जोड़कर चुनाव मैदान में उतरने के लिए अपना दमखम जाहिर कर दिया है। कुल मिलाकर क्षेत्र में तीसरी ताकत बनने के लिए इन दोनों पार्टियों में जमकर रस्साकसी चल रही है।