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आयुर्वेद कॉलेज को सात साल बाद मिली मानव देह, डेढ़ सौ छात्र सीखेंगे मानव शरीर की संरचना

शासकीय आयुर्वेद कॉलेज को सात साल बाद मानव देह मिली है। कॉलेज में बीएएमएस के प्रथम और द्वितीय वर्ष के 75-75 छात्र हैं। इस मानव देह से यह 150 छात्र प्रैक्टिकल...

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gwalior Ayurveda College

आयुर्वेद कॉलेज को सात साल बाद मिली मानव देह, डेढ़ सौ छात्र सीखेंगे मानव शरीर की संरचना

ग्वालियर. शासकीय आयुर्वेद कॉलेज को सात साल बाद मानव देह मिली है। कॉलेज में बीएएमएस के प्रथम और द्वितीय वर्ष के 75-75 छात्र हैं। इस मानव देह से यह 150 छात्र प्रैक्टिकल कर मानव शरीर की संरचना का अध्ययन कर सकेंगे। एनाटॉमी विभाग को चिकित्सा की बारीकियां सिखाने के लिए मृत मानव शरीरों की जरूरत पड़ती है। हाल में आयुर्वेद महाविद्यालय के छात्रों ने प्रैक्टिकल के लिए मानव शरीर की डिमांड की थी। जिसके बाद उज्जैन से 22 जून को महाविद्यालय को मानव देह मिली है। अभी तक यहां छात्र डमी मॉडल प्रैक्टिकल कर रहे थे। अब मानव देह मिलने से उन्हें प्रैक्टिकल में सुविधा होगी।
एनाटॉमी का नया हॉल बनेगा : शासकीय आयुर्वेद कॉलेज में एनाटॉमी विभाग का नया हॉल बनेगा। इसके लिए मंजूरी मिल गई है। बहुत जल्द हॉल तैयार होगा। साथ ही आयुर्वेदिक अस्पताल के लिए ओपीडी व कैंटीन भी बनाई जाएगी।


आयुक्त के प्रयास से मिली देह
आयुष विभाग की आयुक्त सोनाली पोंक्षे अप्रेल में भोपाल से शासकीय आयुर्वेद कॉलेज ग्वालियर आई थीं। उन्होंने यहां की व्यवस्थाओं को देखने के बाद बीएएमएस के छात्रों से मुलाकात कर उनकी परेशानी जानी थी। जिसमें छात्रों ने प्रैक्टिकल के लिए मानव देह की जरूरत बताई थी। उसके बाद यह मानव देह मिली है। इससे पहले 2016 में एक अधूरी देह महाविद्यालय को मिली थी।

इस तरह सुरक्षित रखा जाता है मृत शरीर
मृत मानव देह को सालों तक सुरक्षित रखने के लिए केमिकल का प्रयोग किया जाता है। मानव शरीर में खून की नलियों को केमिकल के टैंक में डुबाकर रखा जाता है। जब छात्रों को प्रैक्टिकल करना होता है तो मृत देह को टैंक से बाहर निकाल कर प्रैक्टिकल कराया जाता है। उसके बाद फिर देह को टैंक में रख दिया जाता है।

इनका कहना
मानव देह के लिए दस साल से प्रयास किए जा रहे थे। अब उज्जैन से एक मानव देह मिल गई है, जिससे छात्र प्रैक्टिकल कर सकेंगे।
डॉ. महेश शर्मा, प्राचार्य शा.आयुर्वेद कॉलेज