
Bachchon me motapa kaise roke
Bachchon me motapa kaise roke: मोटापा किसी भी उम्र में हो इसे सेहत के लिए गंभीर दुष्प्रभावों वाला माना जाता है। मोटापे (Bachchon me motapa) के कारण ही कम उम्र में लोग डायबिटीज, हृदय रोग और लिवर से संबंधित बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर कहते है कि बच्चों में अगर बढ़ते मोटापे की समस्या को कंट्रोल न किया गया तो भविष्य में यह कई प्रकार की गंभीर और क्रोनिक बीमारियों का कारण बन सकती है। जीआरएमसी के पीडियाट्रिक विभाग ने दो साल पहले शहर के कई स्कूलों में जाकर एक हजार बच्चों का सर्वे कराया। जिसमें सामने आया कि 150 से ज्यादा बच्चों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह समस्या समय रहते कंट्रोल नहीं की गई तो ऐसे बच्चों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो जाएगी।
पीडियाट्रिक विभाग ने बड़े स्कूलों में जाकर सर्वे किया। जिसमें 10 से 19 साल तक बच्चों का परीक्षण किया। इसमें लड़कियों से ज्यादा लडक़ों में मोटापा हावी था। लड़कियां अपने शरीर के बारे में सोचती है। जबकि लडक़े जंक फूड आदि खाने से परहेज नहीं करते।
एक हजार बच्चों के सर्वे में यह बात सामने आई कि 10 प्रतिशत बच्चे अधिक वजन के और पांच मोटापे की श्रेणी में आए थे, जिनमें से पांच फीसदी बच्चों में तो तुरंत हस्तक्षेप करके डाइट चार्ट के आधार पर देखरेख करनी थी। वहीं 10 फीसदी बच्चों में भविष्य में मोटापा न आए। इसके लिए प्रयास शुरू करने थे।
कोरोना काल से ही हर किसी की लाइफ स्टाइल पर असर पड़ा है। इसमें खासतौर पर बच्चों की दिनचर्या में अभी भी बदलाव नहीं आया है। स्कूलों में पढ़ने के बाद भी अब बच्चों को मोबाइल और कम्प्यूटर की आदत सी पड़ गई है। बच्चे स्कूल से आने के बाद घंटों किसी न किसी बहाने से मोबाइल, कम्प्यूटर का इस्तेमाल करते हैं। अगर इस समय बच्चे घर के बाहर आउट डोर गेम खेलें तो कुछ हद तक शरीर सही हो सकता है।
-- बच्चों को टीवी, कम्प्यूटर के सामने कम समय बिताने दें।
-- जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, नमक और चीनी कम से कम खिलाएं।
-- जॉगिंग, रनिंग, स्विमिंग, योगा, डांस जैसी गतिविधियां करवाएं।
-- शीतल पेय, स्पोर्ट्स ड्रिंक की जगह ज्यादा से ज्यादा पानी पीने दें।
-- बच्चों को बाहर खेलने के लिए भेजें।
दिनचर्या में आए बदलाव के चलते बच्चे सेहत का ख्याल नहीं रख रहे। यही कारण है कि बच्चों में मोटापा और वजन बढ़ रहा है। इसके लिए माता पिता को भी प्रयास करना चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों का ख्याल रखें और घर से निकलकर पैदल चलने के साथ खेलकूद की तरफ भी प्रेरित करें। वहीं जंक फूड खाने से बचें और घर का बना खाना ही खाएं।
-डॉ अजय गौड़, एचओडी शिशु रोग विभाग जीआरएमसी
Published on:
04 Mar 2025 11:59 am

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