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चीन के मॉडल पर ग्वालियर में लगने जा रही है प्रदेश की सबसे बड़ी भगवान आदिनाथ की मूर्ति

चीन के मॉडल पर ग्वालियर में लगने जा रही है प्रदेश की सबसे बड़ी भगवान आदिनाथ की मूर्ति

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bhagwan aadinath states statue placed in gwalior based on china mode

चीन के मॉडल पर ग्वालियर में लगने जा रही है प्रदेश की सबसे बड़ी भगवान आदिनाथ की मूर्ति

ग्वालियर. जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी की मोक्ष स्थली चीन के कैलाश मानसरोवर में स्थित अष्टापद जैन तीर्थ स्थल की तर्ज पर ग्वालियर के बरई में जिनालय तैयार होने जा रहा है। इसका भूमिपूजन समाज के लोगों द्वारा किया गया। यहां 72 मंदिरों के साथ 41 फीट की भगवान आदिनाथ की मूर्ति स्थापित होगी। इस प्रतिमा के दर्शन हाइवे से निकलने वाले श्रद्धालु आसानी से कर सकेंगे।

ये प्रदेश का पहला जैन मंदिर होगा, जहां एक साथ भगवान आदिनाथ की 41 फीट ऊंची प्रतिमा के साथ 72 मंदिरों को अष्टापद के आकार में बनाया जा रहा है। यहां चीन में स्थित कैलाश मानसरोवर की शृंखला में जैन तीर्थ स्थल की तर्ज पर पर्वत का आकार दिया जा रहा है। अष्टापद बनाए जाने के बारे में जैन समाज के प्रवक्ता ललित जैन ने बताया कि जैन धर्म के लोग आर्थिक तंगी, वीजा, पासपोर्ट आदि की वजह से अष्टापद के दर्शन करने नहीं जा पाते हैं। ऐसे श्रद्धालुओं के लिए बरई के सिद्ध क्षेत्र में जिनालय तैयार कराया जा रहा है। तीर्थ स्थल पर करीब एक साल में 72 मंदिर बनाए जाने और आदिनाथ की प्रतिमा स्थापित कराए जाने का काम पूरा कर लिया जाएगा।

ऐसा होगा तीर्थ स्थल का स्वरूप
बरई में जिनेश्वर धाम तीर्थ की तलहटी में 72 छोटे-छोटे मंंदिर बनाए जाएंगे। इस तीर्थ स्थल पर 15 फीट के प्लेटफॉर्म पर 5 फीट का 5 क्विंटल वजनी कमल रखा जाएगा, उसके ऊपर 21 फीट ऊंची भगवान आदिनाथ की प्रतिमा खड़े रूप में विराजित की जाएगी। यह प्रतिमा जमीन से 41 फीट ऊंची होगी, जो प्रदेश में जैन भगवान की प्रतिमाओं में सबसे ऊंची प्रतिमा होगी। वहीं कैलाश पर्वत का स्वरूप देते हुए भगवान की प्रतिमा के नीचे गोलपत्थर एवं मिट्टी का पर्वत बनाया जाएगा, जिसमें तीन-तीन फीट ऊंचे 72 मंदिर बनाए जाएंगे। सभी मंदिरों में भगवान की प्रतिमा विराजित की जाएगी। इन मंदिरों के दर्शन करने से कैलाश पर्वत पर स्थित अष्टापद जिनालय की कल्पना की जा सकेगी।