22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अब लड़ाई तलवार की नहीं कलम की

वीरांगना झलकारी बाई की जयंती पर राजनैतिक पार्टियों ने किया याद

2 min read
Google source verification
वीरांगना झलकारी बाई की जयंती

Birth Anniversary of Heroine Jhalkari Bai

ग्वालियर. वीरांगना झलकारी बाई की जयंती पर मंगलवार को राजनैतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों ने याद कर आकाशवाणी स्थित मूर्ति पर पुष्पाजंलि अर्पित की। सुबह से देररात तक पुष्पाजंलि अर्पित करने करने वालों की भीड़ लगी रही। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा, वीरांगना झलकारी बाई की जयंती पर मुख्यमंत्री से मिलकर अवकाश घोषित करने की मांग रखूंगा।

युवा जनशक्ति संगठन आकाशवाणी स्थित झलकारी बाई की प्रतिमा पर आयोजित कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा, अब लड़ाई तलवार नहीं कलम की है। आपके हितों को ध्यान में रखते हुए झलकारी बाई के पार्क का उन्नयन करने के साथ-साथ हॉस्टल का स्थान चयनित करने के लिए कलेक्टर के साथ समाज के प्रतिनिधि मंडल की प्रतिनिधिमंडल की जाएगी। बीज निगम के अध्यक्ष मुन्नालाल गोयल ने कहा, वीरांगना झलकारी बाई ने अपनी मातृभूमि झांसी और रानी लक्ष्मीबाई को बचाने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इस वीरांगना के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता है। मुख्य वक्ता कैप्टन रामसिया शाक्य ने वीरांगना झलकारी बाई के संघर्षों एवं उनके कृतित्वों की जानकारी दी। कार्यक्रम में पूर्व सैनिक, राष्ट्रीय खिलाड़ी, कोरोना वॉरियर्स व समाज कल्याण के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया। इस अवसर पर महापौर शोभा सिकरवार, अभय चौधरी, पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य आशीष प्रताप सिंह राठौर, पूनम वर्मा आदि उपस्थित थे।

अंग्रेजी हुकुमत से टकराई वीरंगना झलकारी बाई: महापौर

वीरांगना झलकारी बाई की 191वीं जयंती पर कांग्रेस ने भी माल्यार्पण कर शाम को दीप प्रज्जवलित कर पुष्पाजंलि अर्पित की। महापौर शोभा सिकरवार और विधायक डॉ. सतीश सिकरवार ने कहा, महारानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकुमत के छक्के छुटाने में और भारत की आजादी के आंदोलन में झलकारी बाई ने देश की महिलाओं को अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ जंग करने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रभारी अध्यक्ष महाराज सिंह पटेल, आनंद शर्मा, अमर सिंह माहौर, अवधेश कौरव, प्रभूदयाल जौहरे, वीरेन्द्र सिंह तोमर, बलराम ढींगरा सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।