
पढ़ाई के लिए बॉडी नहीं मिल रही थी, डेढ़ सौ डॉक्टरों ने लिया देहदान का संकल्प
ग्वालियर. एनाटॉमी विभाग के छात्रों को प्रैक्टिकल के लिए मृत मानव शरीर की जरूरत पड़ती है। लेकिन शहर में जागरूकता की कमी के चलते लोग काफी कम संख्या में अपनी बॉडी दान करते है। ऐसी व्यवस्था पिछले काफी समय से चली आ रही है। इसके चलते जीआरएमसी में अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए संकट खड़ा हो गया। इसे देखते हुए जीआरएमसी के डॉक्टरों ने एक नई पहल की शुरुआत की है। इसके तहत डॉक्टर अपनी बॉडी दान करेंगे। एनाटॉमी विभाग के पास लगभग डेढ सौ से अधिक डॉक्टरों ने अपनी स्वीकृति दे दी है। रविवार को एनाटॉमी विभाग के पूर्व डॉक्टर बीडी चौरसिया के जन्मदिन के अवसर पुण्यतिथि मनाई जाएगी। इस अवसर एनाटॉमी विभाग के प्रथम वर्ष के छात्रों को शपथ दिलाई जाएगी। उसी के तहत डॉक्टर भी अपनी बॉडी देने के लिए अपनी स्वीकृति देंगे। इस अवसर पर जीआरएमसी के डीन के साथ कई विभाग के एचओडी और अन्य डॉक्टर शामिल होंगे।
इस तरह सुरक्षित रखा जाता है मृत शरीर
मेडिकल कॉलेज में आने वाली बॉडी को सालो साल जीवांत रखने के लिए कैमिकल का प्रयोग किया जाता है। बॉडी में खून की नलियों में कैमिकल डालने के बाद बॉडी को टैंक से बाहर निकाल कर छात्रों को प्रेक्टिकल कराया जाता है। उसके बाद फिर से टैंक में बॉडी को रख दिया जाता है।
पिछले वर्षो में मिली बॉडी
- 2017- 6
- 2018- 4
- 2019- 3
- 2020- 1
- 2021- 1
- 2022- 1
- 2023- 5
इनका कहना है
देहदान के लिए जागरूकता की कमी के चलते काफी कम लोग अपनी रूचि दिखा रहे है। लेकिन अब डॉक्टरों ने एक अच्छी पहल की है। इसके तहत लगभग डेढ सौ से अधिक डॉक्टरों ने शपथ पत्र देकर बॉडी दान करने का निर्णय लिया है।
डॉ. सुधीर सक्सेना, एचओडी एनाटॉमी विभाग जीआरएमसी
Published on:
01 Oct 2023 07:39 pm
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
