
ग्वालियर। प्रखर नर्सिंग कॉलेज में छात्र-छात्राओं के फर्जी एडमिशन कराकर, फिर उनके बैंक में फर्जी एकाउंट खोलकर ४५ छात्र-छात्राओं के नाम से सिर्फ एक साल में छात्रवृति के ६२ लाख रुपए हड़प लिए। फर्जीवाड़े में आदिम जाति कल्याण विभाग और बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी अधिकारी शामिल हैं।
एजेके पुलिस ने छात्रवृति घोटाले का पर्दाफाश कर बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक राधेश्याम गुप्ता और आदिम जाति कल्याण विभाग के कम्प्यूटर ऑपरेटर रवि माहौर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आज दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें एक दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है। इस मामले में मारस्टर माइंड माना जा रहा आदिम जाति कल्याण विभाग का मुख्य एकाउंटेंट ओपी शर्मा अभी फरार है। पुलिस का कहना है कि घोटाले में और भी कई अधिकारी, कर्मचारियों के नाम सामने आ सकते हैं।
एजेके एसपी वीरेन्द्र जैन ने बताया कि घोटालेबाजों ने वर्ष 2014 में 45 छात्र-छात्राओं का पुरानी छावनी स्थित प्रखर नर्सिंग कॉलेज में एड़मिशन कराया। उन सभी के जौरासी स्थित बालाजी पब्लिक स्कूल की तरफ से फर्जी हस्ताक्षर कर और फोटो लगाकर सिटी सेंटर स्थित बैंक ऑफ इंडिया में एकाउंट खुलवाए गए। बैंक ने सभी के एटीएम भी जारी कर दिए। एकाउंट में पैसे आने पर घोटालेबाजों ने एटीएम से 62 लाख की रकम निकाल ली। घोटाले में शामिल बैंक मैनेजर राधेश्याम गुप्ता रिटायर्ड हो गए हैं। इस फर्जीवाड़े का खुलासा करने में एजेके डीएसपी मुनीष राजौरिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कुसुम की हिम्मत रंग लाई
मुरैना निवासी कुसुम जाटव की हिम्मत से पुलिस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर पाई। माफियाओं ने कुसुम का भी फर्जी दाखिला कर खाता खुलवाकर 29 हजार रुपए की छात्रवृति निकाल ली। उसने दूसरे कॉलेज में दाखिला लिया तब उसे पता चला। उसने पता किया तो प्रखर कॉलेज का नाम आया। जबकि उस कॉलेज में कभी पढ़ी ही नहीं। न ही उसने बैंक में एकाउंट खोला। उसने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की। मामला एजेके पुलिस को सौंपा गया। कुसुम भी डटी रही, पीछे नहीं हटी।
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बिना वेरिफिकेशन के खोले एकाउंट
जिस साल घोटाला हुआ उस समय राधेश्याम गुप्ता बैंक ऑफ इंडिया में वरिष्ठ प्रबंधक थे। उन्होंने दस्तावेज चेक किए बिना एकाउंट खोल दिए। यही नहीं वेरिफिकेशन भी नहीं कराया। बालाजी स्कूल के सिम्पल लेटर पर ४५ खाते खोल दिए। जांच में बैंक के रजिस्टर चेक हुए तो उनमें एटीएम का उल्लेख ही नहीं था। पासबुक देखी तो पता चला एटीएम से पैसा निकाला गया है। बिना जांच आवेदन किए पास: छात्रवृति के लिए कॉलेज की तरफ से आदिम जाति कल्याण विभाग को आवेदन भेजे जाते हैं। ओपी शर्मा और रवि माहौर ने आवेदन चेक किए बिना ओके कर भोपाल भेज दिए। वहां से आवेदन पास होकर पैसा खाते में आ गया।
Published on:
01 Mar 2018 10:36 am
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