
पापा का सपना पूरा करने किया सीए, आज 17 कंपनी की फाइनेंस मैनेजर
ग्वालियर.
मेरे पापा का सपना था कि वे सीए बने, लेकिन किसी कारणवश नहीं बन सके। उन्होंने एक बार मुझे इस बारे में बताया। तब मैंने ठान लिया कि मुझे सीए बनना है। मैंने केआरजी से बीकॉम के साथ ही सीए की तैयारी की और एक बार में ही सीए फाउंडेशन क्लियर कर लिया। इस दौरान मैंने कोचिंग भी पढ़ाई। एक साथ 60 बच्चों का बैच हैंडल करती थी। इसके बाद विलासपुर में जॉब की। दो साल बाद इंदौर में मैरिज हो गई। इसके बाद मैं दुबई शिफ्ट हो गई। दो साल वेट किया। फिर जॉब जॉइन की। बिगनिंग में स्ट्रगल बहुत था। मेरी जॉब अबु धाबी में लगी। दुबई से काफी ट्रेवल करना पड़ता था, लेकिन इस अपॉच्र्युनिटी को मैं खोना नहीं चाहती थी। इसके बाद हम अबू धाबी में ही रहने लगे। आज मैं 17 कंपनीज की फाइनेंस मैनेजर हूं। जब मैंने जॉब की शुरुआत की। जब मैं ग्वालियर में थी तब हम फ्रेंड्स मिलकर एक ग्रुप चलाते थे, जिसे मैंने बहुत मिस किया। लेकिन जब सोसायटी बन गई तो वे भी कमी पूरी हो गई।
अनुभव
- इंडिया के त्योहारों को मिस करती थी। तब मारवाड़ी फैमिलीज को तलाशा और ग्रुप बनाया। अब सभी त्योहार मिलकर सेलिब्रेट करते हैं।
- दुबई आई तो बहुत सोशल थी। धीरे-धीरे अपने आपको चेंज किया।
- शुरुआत में नई थी। स्ट्रगल बहुत था, लेकिन पेशेंस रखा और हार्डवर्क से सफलता पाई।
माधुरी सारडा, चार्टर एकाउंटेंट, दुबई
Published on:
13 Nov 2021 09:37 am
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