
चंबल संभाग के दिग्गज नेता नरेंद्र सिंह तोमर का आखिर कैसे बढ़ता गया कद, जानिए
ग्वालियर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में केंद्रीय मंत्रिमंडल में मप्र के दिग्गज और चंबल संभाग के दिग्गज नेता का सियासी कद लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसका मुख्य कारण है उनकी संगठनात्मक क्षमता के साथ ही प्रशासन पर मजबूत पकड़ और कुशल रणनीतिकार के रूप में जाना। जी हां हम बात कर रहे हैं मुरैना लोकसभा सीट से जीत दर्ज करने वाले नरेंद्र सिंह तोमर की। जिन्हें इस बार प्रधानमंत्री मोदी के दूसरे कार्यकाल में केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली और उन्हें अहम पद कृषि मंत्रालय भी दिया गया। पांच साल के दौरान तोमर का परफार्मेंस देखकर मोदी-शाह उन्हें सत्ता-संगठन के मामलों में काफी महत्व देने लगे हैं। राजनीतिक प्रेक्षक इसे उनके सियासी कद और प्रभाव में बढ़ोतरी के रूप में देख रहे हैं।
वहीं वह मोदी और शाह के भी काफी करीबी माने जाते है। पहले कार्यकाल के दौरान मोदी ने उन्हें जो भी जवाबदारी दी,उसे उन्होंने बखूबी निभाकर मोदी और शाह का भरोसा जीत लिया। यही वजह है कि खान,पंचायती राज,ग्रामीण विकास एवं संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय उन्हें सौंपे गए थे। इसके बाद इस बार उन्हें कृषि मंत्री का पद दिया गया। मोदी के पहले कार्यकाल में मंत्रियों की सूची में उनका क्रम 15वां था,जो कि इस बार 'टॉप टेन" में सातवां हो गया। प्रदेश के दूसरे वरिष्ठ नेता केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत पिछली बार 19वें क्रम पर थे जो इस बार वरिष्ठता सूची में 11वेंक्रम पर पहुंच गए हैं।
दूसरी बार मंत्री बने तोमर
नरेंद्र सिंह तोमर 1977 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष बनाए गए थे। युवा मोर्चा में विभिन्न पदों पर रहते हुए 1996 में युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए। तोमर पहली बार 1998 में ग्वालियर से विधायक निर्वाचित हुए और इसी क्षेत्र से वर्ष 2003 में दूसरी बार चुनाव जीता। इस दौरान वे उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में कई महत्त्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी रहे। तोमर दो बार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहे और दोनों बार प्रदेश में भाजपा सरकार बनी थी। इसे कुशल नेतृत्व का परिणाम माना गया।
नरेन्द्र सिंह तोमर
उम्र- 62 वर्ष
शिक्षा- स्नातक
मोदी की भरोसेमंद टीम में शामिल
कुशल रणनीतिकार है तोमर
मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में पोरसा विकासखंड के गांव ओरेठी में 12 जून 1957 को जन्म हुआ। उनके पिता मुंशी सिंह तोमर किसान रहे हैं। उन्होंने स्नातक स्तर तक शिक्षा ली। इस दौरान वे कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। शिक्षा पूरी करने के बाद वे ग्वालियर नगर निगम के पार्षद पद पर निर्वाचित हुए। फिर राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हो गए।मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल किए गए तोमर संगठनात्मक क्षमता के साथ ही प्रशासन पर मजबूत पकड़ और कुशल रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं।
तोमर पहली बार प्रदेश के मुरैना संसदीय क्षेत्र से वर्ष 2009 में लोकसभा जीते, फिर 2014 में ग्वालियर और 2019 में वापस मुरैना से लोकसभा चुनाव जीते। वर्ष 2009 के पहले वे प्रदेश से राज्यसभा सदस्य थे। वे 15 जनवरी 2009 में निॢवरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। इसके बाद राष्ट्रीय महामंत्री रहे और बाद में लोकसभा चुनाव में उतरे थे। वह अब तीन बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं।
सीट बदलकर भी भारी मतों से जीते
इस बार ग्वालियर में पूर्व में बेहतर स्थिति न पाकर तोमर ने सीट बदलकर मुरैना से चुनाव लड़ा था। 2009 में मुरैना उनकी संसदीय सीट थी, इसलिए मुरैना में पहले से उनकी पकड़ रही। अब वापस मुरैना से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। तोमर पहली बार प्रदेश के मुरैना संसदीय क्षेत्र से वर्ष 2009 में लोकसभा जीते, फिर 2014 में ग्वालियर और 2019 में वापस मुरैना से लोकसभा चुनाव जीते। वर्ष 2009 के पहले वे प्रदेश से राज्यसभा सदस्य थे। वे 15 जनवरी 2009 में निॢवरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। तोमर ने इस बार मुरैना लोकसभा सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता रामनिवास रावत को इस बार करीब सवा लाख वोटों से हराया है जो कि भारी मतों से जीत हासिल करना है।
इस बार अहम पद दिया
तोमर को मोदी खेमे से माना जाता है। पहले कार्यकाल में उनके पास ग्रामीण विकास और खनन मंत्रालय जैसे अहम विभाग थे। इसमें उनके कामों को भी मोदी ने पसंद किया था। अब दूसरी बार भी उनको अहम विभाग दिया गया। इस बार उन्हें कृषि मंत्रालय का जिमा दिया गया।
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Published on:
31 May 2019 03:53 pm
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