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#FLASHBACK: साल 2016 में CBSE ने किए ये बदलाव, जो आपको जानना हैं बहुत जरुरी

साल 2016 भी शिक्षण प्रणाली में हुए इन्ही बदलावों से भरा हुआ है। आइए यहां हम उन्ही बदलाबों पर एक नजर डालते हैं और शिक्षण पद्धती में हुए चैंजेस को देखते हैं। 

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Shyamendra Parihar

Dec 26, 2016

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ग्वालियर। शिक्षा का महत्व किसी के भी जीवन में बहुत महत्व रखता है। जिसके लिए हमारी शिक्षण प्रणाली कुछ न कुछ बदलाव करती रहती है। जिससे हमारे बच्चे बेहतर से बेहतरीन हों सकें। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई बदलाव लगातार होते रहते हैं। साल 2016 भी शिक्षण प्रणाली में हुए इन्ही बदलावों से भरा हुआ है। आइए यहां हम उन्ही बदलाबों पर एक नजर डालते हैं और शिक्षण पद्धती में हुए चैंजेस को देखते हैं।


कक्षा 10 वीं को किया बोर्ड
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी ने हाल ही में बहुत बड़ा बदलाव करते हुए 10वीं क्लास में बोर्ड बेस्ड एग्जाम को एक बार फिर से अनिवार्य कर दिया है। अभी तक स्कूल बेस्ड और बोर्ड बेस्ड एग्जाम कंडक्ट किए जाते थे। इस बदलाव के बाद अब केवल बोर्ड बेस्ड एग्जाम ही आयोजित होगा। केंद्रीय संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि यह गलत है कि 2.3 करोड़ छात्र बोर्ड एग्जाम दें और बाकी के 20 लाख छात्र नहीं। इसलिए अब 2018 में होने वाले एग्जाम में सभी छात्रों को बोर्ड की परीक्षा में सम्मलित होना पड़ेगा।

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तीन लैग्वेज हुई जरूरी
सीबीएसई स्कूल के स्टूडेंट्स को सेकेंडरी क्लास में अब तीन लैंग्वेज पढऩा पड़ सकता है। सीबीएसई बोर्ड ने क्लास 10वीं तक त्रिभाषा फॉमूर्ला को लागू करने की सिफारिस मानव संसाधन विकास मंत्रालय से की है। वहीं मंत्रालय की ओर से बोर्ड की इस सिफारिश को स्वीकार करने के संकेत दिए है।


सीबीएसई बोर्ड द्वारा क्लास आठवीं तक त्रिभाषा फॉमूर्ला लागू है। तमिलनाडु और पुडुचेरी को छोड़कर अन्य सभी राज्य क्लास आठवीं तक तीन लैग्वेज को जगह दी हैं। इसके तहते हिंदी, इंग्लिश के अलावा आठवीं अनुसूचित में शामिल 22 भाषाओं में से किसी एक भाषा को स्टूडेंट्स चुन सकते है। इसमें संस्कृत भी शामिल है। गैर हिंदी राज्य तो अपने राज्य भाषा को चुन लेते हैं लेकिन हिंदी राज्य के पास संस्कृत के अलावा कोई ओर विकल्प नहीं होता था । इसलिए हिंदी राज्यों में क्लास दसवीं तक संस्कृत की पढ़ाई अनिवार्य हो जाएगी

" नहीं चलेगी मनमानी, बोर्ड सिलेक्ट करेगा प्रिंसिपल "
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सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंड्री एजुकेशन (सीबीएसई) से मान्यता प्राप्त प्राइवेट अनऐडेड स्कूल अब प्रिंसिपल या स्कूल हेड्स की नियुक्ति खुद से नहीं कर सकेंगे। बोर्ड ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्कूलों में इस तरह की नियुक्तियों की निगरानी का अधिकारी अपने हाथ में ले लिया है। इसके अलावा अगर कोई टीचर प्रिंसिपल बनना चाहते हैं तो उनको बोर्ड द्वारा आयोजित प्रिंसिपल एलिजिबिलिटी टेस्ट (पीईटी) क्वालिफाई करना होगा।

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अगर हुए फेल तो नो रिइवैल्यूएशन, देनी होगी फिर से परीक्षा
सीबीएसई के नए नियम के अनुशार जो छात्र इस बार 12वीं की बोड परीक्षा देने जा रहे हैं, उनके लिए अब नियमों मे बड़ा बदलाव किया गया है। अगले साल (2017) में रिजल्ट आने के बाद छात्र रिइवैल्यूएशन (पुर्नमूल्यांकन) या रिटोटलिंग के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। बोर्ड ने 2017 के परीक्षाओं से यह व्यवस्था खत्म करने का फैसला लिया है। सीबीएसई के नए नियम के बाद 2017 में अब जो छात्र पूरक आएंगे, उन्हें सीधे वही परीक्षा देनी होगी, जिस विषय में वह पूरक आए हैं।

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जांच सकेंगे अपनी डिजीटल कॉपी
रिइवैल्यूएशन व्यवस्था खत्म होने से उन छात्रों के सामने मजबूत विकल्प खत्म हो जाएगा, जो किसी एक या दो विषय में महज कुछ अंक से फेल हो जाते हैं। पहले ऐसे छात्रों के पास उन विषयों में रिइवैल्यूएशन का मौका होता था। लेकिन बोर्ड की डिजिटल कापी देखने की सुविधा छात्रों के पास रहेगी। वे अपने किसी भी विषय की डिजीटल कॉपी देख सकेंगे।