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पहले नौरेजा के साथ सिंधी समाज का चालीहा महोत्सव प्रारंभ, शाम को निकली झूलेलाल प्रतिमा की शोभायात्रा

- 40 दिनों तक व्रत-उपवास के साथ होगी भगवान झूलेलाल की होगी पूजा-अर्चना, 25 अगस्त को झूलेलाल जयंती पर होगा समापन

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पहले नौरेजा के साथ सिंधी समाज का चालीहा महोत्सव प्रारंभ, शाम को निकली झूलेलाल प्रतिमा की शोभायात्रा

पहले नौरेजा के साथ सिंधी समाज का चालीहा महोत्सव प्रारंभ, शाम को निकली झूलेलाल प्रतिमा की शोभायात्रा

ग्वालियर. वरुणावतार भगवान झूलेलाल का चालीस दिवसीय महोत्सव चालीहा साहिब उपासना पर्व की शुरूआत शनिवार से हुई। पहला नौरेजा भी इसी दिन के साथ प्रारंभ हुआ। सिंधी समाज का चालीहा महोत्सव 40 दिन यानी 25 अगस्त झूलेलाल जयंती तक चलेगा। इस मौके पर भगवान झूलेलाल के चालीहा उपवास रखने वालों ने शाकाहार का संकल्प लिया। चालीहा महोत्सव के लिए दानाओली और माधौगंज स्थित झूलेलाल मंदिरों पर विशेष तैयारियां की गई थींं। चालीहा महोत्सव में इन 40 दिनों तक अखंड ज्योति की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दौरान भगवान झूलेलाल की पूजा, जल एवं ज्योति के रूप में की जाएगी। चालीहा साहिब पर्व 1400 साल पुरानी सिंध की परंपरा है, सिंधु नदी के तट पर संतों ने इसे शुरू किया था।

यहां से निकली झूलेलाल की प्रतिमा की शोभायात्रा
शनिवार को शाम 6 बजे ध्वजारोहण के साथ महोत्सव की शुरूआत हुई। इसके बाद भगवान झूलेलाल की प्रतिमा की शोभायात्रा निकाली गई, जो दानाओली स्थित झूलेलाल मंदिर से शुरू होकर महाराज बाड़ा, गोरखी स्काउट, लाला का बाजार, माधौगंज थाना चौराहा होकर पुन: दानाओली पर आकर संपन्न हुई। यहां प्रतिमा की स्थापना की गई। उधर माधौगंज स्थित झूलेलाल मंदिर में सुबह 6 बजे भगवान झूलेलाल के अभिषेक के साथ हवन किया गया। इसके बाद ध्वजारोहण के साथ महोत्सव की शुरूआत हुई। मंदिर में हवन के साथ नई ज्योति प्रज्जवलित की गई। यहां झंडवंदन के बाद शाम को बहिराणा साहिब की शोभायात्रा निकाली गई। सिंधी समाज के समाजेसवी अमर माखीजा ने बताया कि अधिकांश लोग व्रत रखकर भगवान झूलेलाल की नियमित पूजा-आराधना करेंगे। इस अवधि में अनेक लोग जरूरतमंदों और वृद्धजनों की सेवा करेंगे।