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प्रदेश में यहां बाढ़ से हुई भारी तबाही, लोगों में अभी भी दहशत

chambal Flood devastation : जिले के अन्य हिस्सों में पर्याप्त बरसात नहीं होने से करीब 1500 हेक्टेयर में खड़ी फसल सूख गई है

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प्रदेश में यहां बाढ़ से हुई भारी तबाही, लोगों में अभी भी दहशत

ग्वालियर। अटेर विकास खण्ड के अलावा रौन, मिहोना, ऊमरी, नयागांव थाना क्षेत्र में चंबल तथा सिंध नदी का जलस्तर बढऩे से आई बाढ़ से जहां लगभग 2500 हैक्टेयर जमीन में खड़ी खरीफ की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। जिले के अन्य हिस्सों में पर्याप्त बरसात नहीं होने से करीब 1500 हेक्टेयर में खड़ी फसल सूख गई है। बाढ़ आपदा के बाद कई परिवार न सिर्फ बेघर हो गए बल्कि फसल बिगड़ जाने से दाने-दाने को मोहताज हो गए है।

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कमोवेश यही हालात ऊमरी, नयागांव, रौन, लहार, भारौली थाना क्षेत्र के सिंध नदी के आसपास खेतों में खड़ी फसल का हुआ है। यदि जिले में बांध निर्माण कराया गया होता तो बाढ़ के पानी को बांध के माध्यम से क्षेत्र की फसल को सिंचाई के उपयोग में लाया जा सकता था जहां अवर्षा के कारण फसल बर्बाद हो रही है। सिंचाई परियोजना स्थापित किए जाने की न केवल मांग की जा रही है 35 साल पूर्व अटेर के ही कनेरा में इसकी नींव भी रखी थी लेकिन अभी तक उसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका।

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दुरुस्त किए जा रहे रास्ते
विदित हो कि बाढ़ में अटेर क्षेत्र के कई गांवों के रास्ते बीहड़ के टीले धंसकने तथा जमीन कट जाने के कारण पूरी तरह से अवरुद्ध हो गए हैं। ऐसे में क्षेत्रीय कृषक न तो घर से बाजार और ना ही अपने खेतों पर पहुंचने की स्थिति में हैं। लिहाजा प्रशासन द्वारा रास्तों को सुगम बनाने की कवायद जेसीबी मशीनों के जरिए शुरू करा दी गई है। रविवार को आधा दर्जन गांवों के रास्ते दुरुस्त कर दिए गए। ताकि आवागमन शुरू हो सके।

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पीडि़तों के परिवार को दी सहायता
अटेर क्षेत्र में बाढ़ के बाद फैली बीमारियों के चलते एक के बाद एक चार लोगों की मौत हो जाने पर प्रशासन द्वारा मृत व्यक्तियों के परिवार को रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से 25-25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की है। बतादें, मुकुटपुरा निवासी मोहरश्री पुरवंशी, ग्राम नावली वृंदावन निवासी रामप्रकाश यादव, अटेर निवासी दिलदार खां एवं रामनाथ पुरवंशी की मौत बाढ़ के बाद उपजी बीमारियों के चलते हो गई है।

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यहां अल्पवर्षा से प्रभावित हुई फसल
अल्पवर्षा के चलते मेहगांव, गोहद एवं भिण्ड की फसल प्रभावित हो गई हैं। बताना मुनासिब है कि जिले में खरीफ की फसल एक लाख से अधिक हेक्टेयर जमीन पर खरीफ की बोवनी की गई थी। ऐसे में बाढ़ और सूखे से तकरीबन 4000 हेक्टेयर फसल खराब हो गई है। शेष 60 हजार हेक्टेयर फसल निजी सिंचाई के साधनों के चलते सुरक्षित है। शासन द्वारा बाढ़ पीडि़तों के लिए 50-50 किलो अनाज वितरण किए जाने के लिए भेजा गया है। घरों में पिछले 15 दिन से चूल्हे नहीं जल रहे थे। शासन तथा समाजसेवियों द्वारा भेजे जा रहे भोजन के पैकेट से पेट भरा जा रहा था। रविवार को अटेर क्षेत्र में गेहूं के बोरे प्रति परिवार को वितरित किए गए।

बाढ़ आपदा में बराबर से सहयोग करने वाले संगठन को सेना ने किया सम्मानित
भिण्ड. अटेर क्षेत्र में बाढ़ आपदा में सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लगातार छह दिनों तक बचाव कार्य में सहयोग करने वाले अटेर विकास संघर्ष संगठन के पदाधिकारियों व सदस्यों को सेना के मेजर द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है। शनिवार को सेना की विदाई के दौरान जब क्षेत्रीय आमजन व सामाजिक संगठनों द्वारा सेना के साहसिक कार्य पर उन्हें सम्मानित किया गया तो इसी दौरान आर्मी मेजर देवेंद्र लांबा व मेजर स्वप्निल पांडेय ने संयुक्त रूप से अटेर विकास संघर्ष संगठन संयोजक अशोक तोमर के अलावा अध्यक्ष विजय कुमार सोनी, सचिव अक्षय दीक्षित, अंकित, आकाश सोनी, अश्वनी सोनी, मुजम्मिल अली, कमल पुरोहित को सम्मानित किया। इस मौके पर मेजर ने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी आपदा के दौरान सहयोग के लिए तत्पर रहना चाहिए। सेवाभावी समाज से न केवल प्रेम बल्कि भाईचारा व अमन विकसित होता है। सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में बाढ़ विपदाग्रस्त नावली वृंदावन, खैराहट, मुकुटपुरा, दिन्नपुरा, मघारा आदि के लोग मौजूद रहे।

बाढ़ ने तबाह करदी चिलोंगा व गढ़ा गांव की गोशालाएं
सुरपुरा थाना क्षेत्र के बीहड़ी ग्राम चिलोंगा व गढ़ा में स्थित दो बड़ी शासकीय अनुदान प्राप्त गोशालाअेंा को चंबल नदी की भीषण बाढ़ ने पूरी तरह तबाह कर दिया है। दोनों गौशालाओं में एक एनीमल एंबुलेन्स ट्रैक्टर ट्राली सहित गायों के लिए भण्डारित भूसा चारा बाढ़ में बह जाने, भवन संरचनाओं के ढह जाने और उनमें क्र्रेक हो जानेसे तकरीबन 25 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।

रविवार को उपसंचालक पशुपालन भिण्ड नवलसिंह सिकरवारने निरीक्षण भी किया गया। श्री गिरधारी गोशाला में रखा एनीमल एंबुलेन्स वाहन व 1.75 लाख का 280 क्विंटल भूसा बह गया। लगभग 6.00 लाख की लागत से बना भूसाघर पूरी तरह ढह गया। गोशाला के संचालक संत अवधूत हरीनिवास ने बताया कि गोशाला की सडक़ पर भारी दलदल जमा है, जिसकी सफाई कराए जाने की जरूरत है। ग्राम गढ़ा में संचालित करुणा गोशाला को भी बाढ़ से लगभग 8.25 लाख रुपए की क्षति पहुंची है। गौशाला की भवन संरचना का बड़ा हिस्सा धराशायी हो गया है। 4.55 लाख का भूसा, गेहूं, दवाएं बह गया। गोशाला संचालक महेन्द्रभाई द्वारा इस नुकसान के बारे में राजस्व अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

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