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देश का यह राज्य बनेगा घडिय़ाल का दूसरा घर,राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य ने बनाई ये रणनीति

पंजाब के हरिके वन्यजीव अभयारण्य चंबल के घडिय़ालों का दूसरा घर बनेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि हरिके अभयारण्य में बसाने के लिए चंबल घडिय़ाल अभयारण्य से 50 घडि

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ग्वालियर/श्योपुर। पंजाब के हरिके वन्यजीव अभयारण्य चंबल के घडिय़ालों का दूसरा घर बनेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि हरिके अभयारण्य में बसाने के लिए चंबल घडिय़ाल अभयारण्य से 50 घडिय़ाल के बच्चे ले जाए जाएंगे। इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है और भेजे जाने वाले 50 बच्चे मुरैना के देवरी केंद्र पर अलग शिफ्ट भी कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि अक्टूबर के अंत या नवंबर के प्रथम सप्ताह में इन बच्चों को हरिके ले जाया जाएगा।

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पंजाब के फिरोजपुर जिले में 86 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हरिके पक्षी अभयारण्य में 41 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा व्यास और सतलज नदी का भाग आता है,जो घडिय़ाल जैसे जलीय जीवों के लिए उपयुक्त पाया गया है। यही वजह है कि पंजाब सरकार ने इस क्षेत्र में घडिय़ालों को बसाने की योजना बनाई है, जिसके लिए गत वर्ष ही अनुमति मांगी गई थी। हालांकि गत वर्ष किन्हीं कारणों से घडिय़ाल के बच्चे चंबल अभयारण्य से नहीं ले जाए जा सके,जिसके चलते ये बच्चे चंबल में ही छोड़े गए थे,लेकिन इस बार सारी औपचारिकताएं और पत्राचार प्रक्रिया पूरी हो गई है। जिसके चलते पंजाब से कभी भी टीम यहां आकर 50 घडिय़ाल बच्चे ले जाएगी।

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10 मेल और 40 फीमेल बच्चे दिए जाएंगे
हरिके अभयारण्य के लिए 50 घडिय़ाल के बच्चे भेजे जाएंगे,जिसमें 10 मेल ओर 40 फीमेल बच्चे होंगे। देवरी घडिय़ाल केंद्र से इस वर्ष चंबल में 145 घडिय़ाल के बच्चे (तीन वर्ष की उम्र के) चंबल में छोड़े जाने थे, जिसमें से 50 पंजाब को दिए जाने के बाद अब 95 बच्चे ही इस बार चंबल में छोड़े जाएंगे।


"पंजाब के हरिके अभयारण्य के लिए 50 घडिय़ाल के बच्चे भेजने के लिए सारी औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं।अब वहां से टीम आएगी,जो इन्हें ले जाएगी,हमने 50 बच्चे अलग शिफ्ट करवा दिए हैं।"
एए अंसारी, डीएफओ,राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य