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बेराजगार युवाओं को रोजगार के लिए उद्याेग लगाने तथा व्यवसाय के लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना (एमएमयूकेवाई) के तहत ऋण उपलब्ध करवाने में ग्वालियर जिला राज्य में दूसरे नम्बर पर है। इस योजना के तहत अन्तर्गत जिले के 3600 युवाओं को लोन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस वर्ष जनवरी से शुरू हुई इस योजना में अब तक जिले के 1657 युवाओं के ऋण आवेदनों को स्वीकार करते हुए कुल 380 युवाओं को 27 करोड़ 13 लाख 65 हजार 380 रुपए का ऋण दिया गया। इस अवधि में इंदौर ने 393 युवाओं को 26 करोड़ 17 लाख 1 हजार 201 रूपए का ऋण दिया गया है। इंदौर में 4200 युवाओं को इस योजना के तहत ऋण देने का लक्ष्य है अब तक 1048 आवेदन स्वीकार किए गए हैं। जबलपुर में 375, रीवा में 332, खरगौन में 324, भोपाल में 293, देवास में 247, रतलाम में 244, मुरैना में 213 तथा सागर में 203 आवेदकों को ऋण दिए गए हैं। राज्य के 18 जिले ऐसे हैं जहां लाभार्थियों की संख्या महज 2 हजार 477 है।
1 लाख का लक्ष्य,6790 को मिला लाभ
इस योजना के तहत राज्य के 52 जिलों के लिए 1 लाख युवाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि अब तक महज 6 हजार 790 लाभार्थियों को ही अब तक इस योजना का लाभ मिला है। यह कुल लक्ष्य का सात फीसदी भी नहीं है।
25 जिलों में लाभार्थी दहाई में
इस योजना के तहत ऋण लेने में युवाओं में उत्साह नहीं है। राज्य के 25 जिले ऐसे हैं जहां लाभार्थियों की संख्या दहाई में हैं। इन जिलों में केवल 1309 आवेदकों को ही ऋण दिया गया। हालांकि लक्ष्य हजारों में है। निवारी में केवल 13 आवेदकों को इस योजना के तहत ऋण दिया गया है। इस जिले में 600 युवाओं को ऋण देने का लक्ष्य है अब तक केवल 110 आवेदन ही आए हैं।
50 हजार से 50 लाख का लोन, 8वीं पास होना जरूरी
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग के अन्तर्गत युवा उद्यमी उद्योग (विनिर्माण) इकाई के लिए 50 हजार से 50 लाख तक लोन लेकर परियोजनाएं शुरु कर सकते हैं। जबकि सेवा (सर्विस) इकाई एंव खुदरा व्यवसाय (रिटेल ट्रेड) के लिए 50 हजार से 25 लाख तक लोन लेकर परियोजनाएं शुरु की जा सकती है। इस योजना के तहत ऋण लेने के लिए 8 वीं पास होना आवश्यक है। 45 साल तक का आवेदक इस योजना के लिए पात्र है।
योजना का उद्देश्य
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत शिक्षित युवाओं को स्वयं का उद्यम/ स्वरोजगार स्थापित करने के लिए बैंको के माध्यम से कोलेटरल फ्री ऋण उपलब्ध कराना है तथा ब्याज अनुदान सहायता के माध्यम से ऋण लागत (कॉस्ट ऑफ क्रेडिट) कम कराकर परियोजना की व्यवहार्यता (प्रोजेक्ट वाइबिल्टी) को बढ़ाना है जिससे प्रदेश में अधिक संख्या में सूक्ष्म उद्यम स्थापित हो सकें, युवाओं की बेरोजगारी दूर हो सके साथ ही प्रदेश के युवा नौकरी के विकल्प के रूप में स्वरोजगार को अपनाने के लिए प्रोत्साहित हो सकें। वित्तीय सहायता के रूप में वितरित ऋण पर 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष ब्याज अनुदान और बैंक ऋण गारंटी फीस, अधिकतम 7 वर्षो के लिए दिए जाने का प्रावधान है।
Published on:
28 Nov 2022 10:11 pm
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