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जीएसटी के विरोध में बंद रहा शहर का कपड़ा बाजार

- दिन भर काम बंद किया विरोध प्रदर्शन, करीब 10 करोड़ का कारोबार हुआ प्रभावित

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जीएसटी के विरोध में बंद रहा शहर का कपड़ा बाजार

जीएसटी के विरोध में बंद रहा शहर का कपड़ा बाजार

ग्वालियर. केंद्र सरकार की ओर से कपड़ों पर बढ़ाए जा रहे जीएसटी के खिलाफ प्रदेश सहित ग्वालियर के कपड़ा कारोबारियों ने भी गुरुवार को अपनी दुकानें-प्रतिष्ठान बंद करके विरोध प्रदर्शन किया। कपड़ा कारोबारियों ने इस दौरान व्यापारी एकता जिंदाबाद और जीएसटी वापस लो जैसे नारे भी लगाए। 1 जनवरी से सरकार कपड़ों पर जीएसटी की दर 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने जा रही है, इसे देखते हुए कपड़ा कारोबारियों ने आंदोलन का रूख किया है। गुरुवार को शहर के नया बाजार, गांधी मार्केट, दही मंडी, हेमराज मार्केट, नई सडक़, उपनगर ग्वालियर, मुरार के बजाज खाना आदि जगहों पर कपड़े की दुकानें बंद रहीं। इस दौरान कपड़ों की खरीदारी करने पहुंचे ग्राहक परेशान होते दिखाई दिए। वहीं महाराज बाड़ा स्थित नारायण दास क्लॉथ मार्केट में कुछ कारोबारियों ने अपनी दुकानें खोल रखीं थीं और ग्राहकी भी कर रहे थे। इस पर दूसरे कपड़ा कारोबारियों ने विरोध जताया तो इन कारोबारियों ने अपनी दुकानें बंद कर ली थीं। दी ग्वालियर होलसेल क्लॉथ मर्केंटाइल एसोसिएशन नया बाजार के सचिव विजय जाजू ने बताया कि इस एक दिवसीय बंद से कपड़े की थोक व फुटकर कपड़े का करीब 8 से 10 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है।

जीएसटी की दरें कम नहीं हुई तो सडक़ों पर आंदोलन करेंगे कारोबारी
कपड़ा एवं 1000 से कम कीमत के जूते पर जीएसटी की दर 5 से बढ़ाकर 12 फीसदी किए जाने के विरोध में मप्र चैंबर ऑफ कॉमर्स में बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में अध्यक्ष विजय गोयल और मानसेवी सचिव डॉ.प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा कपड़ा एवं 1000 से कम कीमत के जूते पर जीएसटी की दर 5त्न से बढ़ाकर 12त्न किए जाने का निर्णय, राष्ट्रीय आंदोलन बन गया है। मप्र जीएसटी संघर्ष समिति, इन्दौर के आव्हान पर प्रदेशभर के कपड़ा एवं रेडीमेड व्यवसाईयों ने अपने कारोबार को बंद रखकर, व्यापारिक एकता का संदेश दिया है। शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल की होने वाली बैठक का इंतजार करना चाहिए और यदि इस बैठक में कपड़ा एवं 1000 से कम कीमत के जूते पर जीएसटी की दर को कम नहीं किया जाता है, तो हमें सडक़ों पर आकर आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। बैठक में कैलाश मित्तल, बालमुकुंद गुप्ता, नरेश कुमार सिंघल, गिरधारीलाल चावला, अशोक चावला, प्रदीप भवानी, सोहन अग्रवाल आदि मौजूद थे।

पेट्रोल पंप डीलरों ने नहीं लिया पेट्रोल-डीजल
प्रदेश में वैट की दरें कम कराने सहित दूसरी मांगों को लेकर पेट्रोल पंप डीलरों का विरोध लगातार जारी है। पहले चरण में शाम के समय ब्लैक आउट करने के बाद गुरुवार से दूसरे चरण की शुरूआत हुई, जिसमें ग्वालियर-चंबल संभाग के पेट्रोल पंप डीलरों ने गुरुवार को किसी भी तेल कंपनी से पेट्रोल-डीजल की खरीदारी नहीं की। हालांकि पेट्रोल पंपों पर आने वाले ग्राहकों को रोजाना की तरह ही पेट्रोल-डीजल उपलब्ध कराया गया। ग्वालियर डिस्ट्रिक्ट पेट्रोलियम डीलर्स ऐसोसिएशन के सचिव अमित सेठी ने बताया कि ग्वालियर एवं चंबल संभाग के आठों जिलों में करीब 850 पेट्रोल पंप हैं। महीने के आखरी तीन दिनों में से रोजाना करीब 300 टैंक लॉरियां भरी जाती हैं। गुरुवार को पंप डीलरों ने पेट्रोल-डीजल लेने से साफ मना कर दिया था, फिर भी सुबह 11 बजे बाद करीब 40 गाडिय़ों को पंप डीलरों के यहां जबरन दबाव डालकर भिजवाया गया, डीलरों ने ये गाडिय़ां खाली नहीं कराई हैं। इन्हें शुक्रवार को ही खाली कराया जाएगा। नो परचेस 6 और 13 जनवरी 2022 को भी जारी रहेगा। आंदोलन के अगले चरण की रणनीति 17 जनवरी के बाद समीक्षा कर तय की जाएगी। ग्वालियर-चंबल के सभी पंप डीलरों ने 21 दिसंबर से आंदोलन की शुरूआत की थी।