
Claim of Ending the Iran-Israel-America War Through AI and Astrology (AI Image)
Iran Israel America War- नरेंद्र कुइया, ग्वालियर. माधव इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एमआइटीएस) के इलेक्ट्रकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एके वाधवानी ने ऐसा न्यूरल नेटवर्क मॉडल तैयार किया है जो दावा कर रहा है कि दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर है। ग्रहों की स्थितियों को मापकर वैज्ञानिक आधार वाले मॉडल को दोनों विश्व युद्ध की स्थितियों से मिलान के बाद अभी महाभारत जैसा काल होने का दावा किया गया है। यह रुक-रुक कर चलने वाला 'महासंग्राम' है। यह मॉडल विनाश की ही भविष्यवाणी नहीं करता, शांति की तारीख भी बताता है। 'वर्ल्ड वॉर-3 ड्यूरेशन मॉडल' ने गणना की है कि वर्तमान वैश्विक तनाव का चरम बिंदु कब आएगा और यह आग कब ठंडी होगी। ईरान-इजरायल-अमरीका युद्ध Iran Israel America War के 20 अप्रेल के थम जाने का दावा किया गया है। एमआइटीएस के प्रो. एके वाधवानी बताते हैं कि ए आइ और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर यह मॉडल विकसित किया गया है पर डर फैलाना इसका उद्देश्य नहीं है। यह केवल'प्री- वॉर्निंग' देता है।
एआइ-ज्योतिष: इसमें 'इंडियन नॉलेज सिस्टम' (ज्योतिष) के डेटा को 'एरर बेक प्रोपेगेशन' न्यूरल नेटवर्क (एआइ) से प्रोसेस किया गया है। सूर्य, मंगल, शनि, राहु और बाहरी ग्रहों (यूरेनस, नेपच्यून, प्लूटो) की दूरियां मापकर वैज्ञानिक आधार वाले मॉडल को दोनों विश्व युद्ध के ग्रहों की स्थितियों से ट्रेन किया गया है।
दावा है कि बृहस्पति (गुरु) साल, 2032 तक अतिचारी रहेंगे। ठीक वैसी ही स्थिति, जैसी 5861 वर्ष पूर्व महाभारत युद्ध के समय थी। पांडवों के विरुद्ध लाक्षागृह, विषपान और द्यूत क्रीड़ा जैसे अप्रत्यक्ष युद्ध और षड्यंत्र वर्षों तक चलते रहे, वैसे ही 2032 तक दुनिया में रुक-रुक कर युद्ध व षड्यंत्र चलेंगे। पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ कूटनीतिक, साइबर और इकोनॉमिक वॉर भी शामिल रहेंगे।
प्रारंभ : ईरान-इजरायल- अमरीका युद्ध ग्रहों की चाल के कारण 27 फरवरी, 2026 की शाम (7.14 शाम) से स्थितियां अत्यंत विकट हुई। जब सूर्य, राहु और शनि के मध्य आए थे।
विराम : 20 अप्रेल, 2026 को (03.47 अल सुबह) जब मंगल और शनि की दूरी 'जीरो' हो जाएगी, तब संघर्ष शांत होगा।
एमआइटीएस के प्रो. एके वाधवानी के अनुसार ए आइ और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर यह मॉडल तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य डर फैलाना नहीं, बल्कि 'प्री- वॉर्निंग' देना है। ताकि वैश्विक नेतृत्व और लोग आने वाले समय के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें और पैनिक की स्थिति निर्मित न हो।
Published on:
05 Apr 2026 07:15 am
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