17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एक बैंक जो गरीबों को फ्री उपलब्ध कराता है कपड़े

यहां आगंतुक जरूरतमंदों की मदद, बैंक के प्रबंधक राजकुमारसिंह चौहान, सेल्समैन अवधेश बघेल तथा नम्रता देवी एवं मीरा करती हैं।

2 min read
Google source verification
cloths bank

भिण्ड। बैंक शब्द जेहन में आते ही रुपयों के लेनदेन वाली संस्था का चित्र सामने आ जाता है, पर भिण्ड शहर में पहनने ओढऩे के यूज किए हुए इस्तेमाल योग्य रेडीमेड कपड़ों का भी एक बैंक (प्रयाग कपड़ा बैंक) चल रहा है। यहां हर आयु के गरीब, बेसहारा जरूरतमंदों को नि:शुल्क वस्त्र उपलब्ध कराए जाते हैं। खास बात यह है कि यहां वस्त्र चाहने वाले के नाप के अनुसार पसंद किए हुए कपड़ों को सिलाई और कटिंग करके फिट करने के लिए एक टेलर की भी व्यवस्था है। गुजरे 10 माह में यह बैंक तकरीबन १३ हजार से ज्यादा लोगों को कपड़े पहना चुका है। स्थानीय जिला चिकित्सालय परिसर में बैंक का संचालन नो प्रॉफिट नो लॉस बेसिस पर एक स्वयंसेवी संस्था करती है।


जनवरी 2017 से चल रहा कपड़ा बैंक

कपड़ा बैंक की शुरूआत एक जनवरी 2017 को एक समाजसेवी संस्था ओम् शांति प्रयाग शिक्षा समिति ने की थी। प्रारंभ में समिति ने लोगों से उनके उपयोग से बाहर हो चुके, इस्तेमाल योग्य अच्छे कपड़ों को दूसरों के लिए दान करने का आह्वान किया। इसके लिए शहर की विभिन्न बस्तियों, बाजारों में एक मिनी लोडर वाहन के माध्यम से कपड़े एकत्र किए गए। इन्हें जिला अस्पताल की ओपीडी के बाहर 'नेकी की दीवार' बनाकर खूंटियों पर डिस्प्ले किया गया।


वहां सूचना टांगी गई कि ये वस्त्र हर जरूरतमंद अपनी आवश्यकता के अनुसार यहां से फ्री ले जा सकता है। इस पहल के नतीजे सकारात्मक आए और नेकी की दीवार से लोग आवश्यकता के कपड़े ले जाने लगे, तो संस्था ने जिला अस्पताल प्रबंधन तथा प्रशासन की अनुमति से अस्पताल के पार्किंग केम्पस में एक बड़े से कक्ष में विधिवत कपड़ा बैंक खोल दिया। कपड़ा बैंक में धुले व इस्तरी किए हुए कपड़े पॉलीथिन के बैग्स में रखे जाते हैं। बैंक का आंतरिक दृश्य किसी रेडीमेड गारमेन्ट स्टोर की तरह नजर आता है। यहां आगंतुक जरूरतमंदों की मदद, बैंक के प्रबंधक राजकुमारसिंह चौहान, सेल्समैन अवधेश बघेल तथा नम्रता देवी एवं मीरा करती हैं।

बैंक में एक डिस्प्ले स्टोर है तथा एक स्टोर रूम है। आधा दर्जन कर्मचारी सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक लगातार यहां बैठते हैं। संस्था के प्रमुख प्रबलप्रतापसिंह कहते हैं, पहले हमें खुद लोडर वाहन लेकर गली मोहल्लों में कपड़े प्राप्त करने के लिए घूमना पड़ता था, पर अब लोग खुद अपने कपड़े यहां दे जाते हैं। अच्छे कपड़ों की छंटाई, धुलाई, इस्तरी आदि करके पैकिंग की जाती है जिसके बाद उन्हें डिस्प्ले काउंटर पर भेज दिया जाता है। इच्छुक व्यक्ति को पसंद के कपड़े मुफ्त दिए जाते हैं।