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आचार संहिता: दिव्यांग स्कूल सहित शहर के विकास कार्यों पर असर

आचार संहिता: दिव्यांग स्कूल सहित शहर के विकास कार्यों पर असर

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आचार संहिता: दिव्यांग स्कूल सहित शहर के विकास कार्यों पर असर

ग्वालियर. चुनाव आचार संहिता लगने के बाद अब अंचल के मूक-बधिर दिव्यांगों के लिए बनने वाले 100 सीटर आवासीय विद्यालय के लिए जमीन फाइनल होने के बाद भी सीमांकन सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाई हैं। ज्ञानोदय विद्यालय काम पूरा होने के बाद मंत्रियों द्वारा उद्घाटन किए जाने की बाट जोहता रह गया। अब बच्चों के लिए उपयोगी यह प्रोजेक्ट नई सरकार बनने के बाद ही पूरे हो सकेंगे। इनके अलावा शहर में लगभग 50 करोड़ रुपए के अन्य कामों पर भी आचार संहिता का असर पडऩे की संभावना है। पहले से ही धीमी गति से चल रहे कामों की गति और मंद हो सकती है।

शहर की 13 लाख और ग्रामीण क्षेत्र की 7 लाख से अधिक आबादी की सुविधा के लिए दो साल में लगभग 61 करोड़ रुपए के 22 काम शुरू किए गए थे, इनमें से 4 बंद हो गए और 12 कामों में देर हो रही है। अब इन कामों में नई सरकार आने तक ब्रेक लग सकता है। प्रशासनिक लेट लतीफी और काम की धीमी गति के कारण कुछ समय बाद इनकी लागत में भी 10 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभावित है। स्थिति यह है कि 444.72 लाख रुपए खर्च होने के बाद भी राजस्व मंडल और भू अभिलेख कमिश्नर आयुक्त के कार्यालय का काम अभी 10 फीसदी ही हुआ है। शहर के यातायात के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव आरओबी का काम भी दो महीने तक अटका रह सकता है।


स्कूल : स्वीकृति: 30 मई, 2016
बच्चों को खेल और शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बन रहा ज्ञानोदय स्पोट्र्स कॉम्प्लेक्स का काम पूरा होने के बाद अधिकारियों को उद्घाटन के लिए इंतजार था। कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए 30 मई 2016 को 1325.6 लाख की स्वीकृति दी गई थी। सामाजिक न्याय विभाग की मॉनिटरिंग में पीआइयू ने निर्माण एजेंसी के रूप में यह काम कराया था।

अस्पताल: स्वीकृति: 1 सितंबर, 2009
जयारोग्य चिकित्सालय समूह पर बढ़ रहे मरीजों के दबाव कम करने एक हजार बिस्तर के अस्पताल को मंजूरी दी गई थी। निर्माण के लिए 1 सितंबर 2009 को 116.80 करोड़ रु. की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, 169 लाख रुपए खर्च भी हुए हैं, पर काम नहीं हुआ। प्रदेश सरकार ने रिवाइज्ड स्वीकृत कर काम की मंजूरी दी इसके बाद विभाग जमीन ही झाड़ता रह गया।

खेल परिसर: निर्माण शुरू: जुलाई, 2015
छात्राओं को एक ही परिसर में खेल की बेहतर सुविधाएं देने के लिए विजयाराजे सिंधिया गल्र्स कॉलेज खेल परिसर का निर्माण जुलाई 2015 में 401.8 लाख रुपए की लागत से शुरू हुआ था। काम पूरा करने के लिए 506.33 लाख रुपए के रिवाइज्ड फंड का इंतजार था। इस काम पर 264.36 लाख रुपए से अधिक खर्च कर लगभग 50 फीसदी काम पूरा हो पाया है।

सेंट्रल जेल: स्वीकृति: मार्च, 2017
जेल की सुरक्षा बेहतर करने 6 वॉच टॉवर, सीसीटीवी कंट्रोलरूम, गार्डरूम बनाने की स्वीकृति दी गई थी। इसके लिए मार्च 2017 में 93.77 लाख की स्वीकृति मिली थी। पहले दिसंबर 2017 में और फिर अप्रैल 2018 में काम पूरा होना था, लेकिन अभी तक दो टॉवर ही बने हैं।अभी तक काम पर 59.84 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। जमीन न मिलने से देर हो रही है।

यहां... 70 फीसदी ही पूरा हो पाया काम
बीपीएल सहित अन्य पात्र कार्ड धारकों के बच्चों को आवासीय सुविधा के साथ बेहतर शैक्षणिक सुविधा देने के लिए दिसंबर 2015 में 4734.68 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति के साथ श्रमोदय विद्यालय का काम शुरू किया गया था। यह काम जुलाई में पूरा होना था, लेकिन अभी तक 70 फीसदी ही पूरा हो पाया है।