
प्रदेश के इस दिग्गज नेता ने पंच से की थी राजनीतिक करियर की शुरुआत, आज भी इनके दीवाने है लोग
ग्वालियर। पंच से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले कांग्रेस नेता सत्यदेव कटारे की 22 अक्टूबर को तीसरी पुण्यतिथि है। जिसको लेकर भिण्ड और अटेर में कई जगहों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में भीड़ अपने प्रिय नेता को याद करने पहुंची। प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने वाले कटारे भले ही अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन आज भी उनकी दमदार आवाज और तेज-तर्रार छवि को लोग नहीं भूल पा रहे हैं। आइए हम आपको बता रहे हैं उनसे जुड़ी कुछ यादें।
किसान से ऐसे बने राजनेता
कांग्रेस के वरिष्ठ व तेजतर्रार नेता सत्यदेव कटारे का जन्म 15 फरवरी 1955 को मप्र के भिंड जिले के मनेपुरा (अटेर) में एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन से नेतृत्व क्षमता के धनी कटारे ने अपने गांव से विधानसभा तक का सफर काफी संघर्ष के साथ तय किया। सत्यदेव कटारे ने अंतिम सांस मुंबई के हीरा चंद्रानी अस्पताल में ली। वे लंबी बीमारी से पीडि़त थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही उनके पैतृक गांव मनेपुरा समेत पूरे चंबल संभाग में शोक की लहर थी। बचपन से नेतृत्व क्षमता के धनी कटारे ने अपने गांव से विधानसभा तक का सफर काफी संघर्ष के साथ तय किया।
1985 में पहली बार बने विधायक
अटेर के ग्राम कोषण से 1977 में उन्हें पहली बार पंच चुना गया था। इसके बाद ही उनका करियर शुरू हो गया था। अगले ही साल उन्हें भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस से जोड़ लिया गया। 1978 में वे भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स भोपाल (BHEL) की नौकरी करने लगे। वे यहां छोटी सी नौकरी करते थे। करीब पांच साल बाद 1983 में सेवादल कांग्रेस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में बिहार चले गए थे। वर्ष 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई तब उसके बाद 1985 में विधानसभा चुनाव में वे अटेर से लड़े। वे पहली बार विधायक बन गए थे। फरवरी 1989 से दिसंबर 1989 तक पहली बार प्रदेश शासन में उप परिवहन एवं जेल मंत्री भी बनाए गए थे। वे अटेर से MLA थे।
जब हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ
कटारे वर्ष 1996 में उस समय बाल-बाल बच गए थे जब वे गृहमंत्री थे। अटेर में चंबल की बाढ़ से डूब गए गांवों का दौरा करने गए थे। भोपाल लौटते समय गुना के पास उनका हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था।
61 साल के थे कटारे
भिंड जिले के अटेर विधानसभा के मनेपुरा में 15 फरवरी 1955 को कोकिलाबाई कटारे और जगराम कटारे के घर जन्मे थे सत्यदेव। मनेपुरा गांव में हुआ था। कटारे का अंतिम संस्कार भिंड जिले के मनेपुरा गांव में किया गया था। उनकी पार्थिव देह मुंबई से स्टेट प्लेन से ग्वालियर और सड़क मार्ग से भिंड लाया गया था।
ऐसा था कटारे का जीवन
Published on:
22 Oct 2019 06:50 pm
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