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मिलावट के कारोबार पर कोर्ट टिप्पणी: भ्रष्ट अधिकारी इकट्ठा हो गए हैं, जो दिन दहाड़े कानून की आंखों में धूल झोंक रहे

कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट जताई नाराजगी, जब्ती व कार्रवाई पर उठाए सवाल, ग्वालियर, भिंड, मुरैना के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों कार्रवाई के निर्देश

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मिलावट के कारोबार पर कोर्ट टिप्पणी: भ्रष्ट अधिकारी इकट्ठा हो गए हैं, जो दिन दहाड़े कानून की आंखों में धूल झोंक रहे

मिलावट के कारोबार पर कोर्ट टिप्पणी: भ्रष्ट अधिकारी इकट्ठा हो गए हैं, जो दिन दहाड़े कानून की आंखों में धूल झोंक रहे

हाईकोर्ट की युगल पीठ ने नौ जिलों के खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सभी जगह भ्रष्ट अधिकारी इकट्ठा हो गए हैं। जो दिन दहाड़े कानून का आंख में धूल झोंक रहे हैं। इनकी मिली भगत से ही मिलवाट का कारोबार एक उद्योग बन गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को हटाकर मंडला सिंगरौली भेजना चाहिए। यहां पर मुफ्त का वेतन लेने के साथ-साथ भ्रष्टाचार कर रहे हैं। ये अधिकारी चपरासी बनने लायक नहीं है। इन्हें खाद्य सुरक्षा अधिकारी किसने बना दिया है। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या बाबू से प्रमोट होकर अधिकारी बने हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि कैसे भी मिलावट का कारोबार रुकना चाहिए। दिशा निर्देशों के साथ सात दिसंबर तक तारीख बढ़ा दी है। अवमानना याचिका की सुनवाई जस्टिस रोहित आर्या व जस्टिस अमरनाथ केशरवानी ने की।

इस वजह से कोर्ट हुआ नाराज

- श्योपुर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने 298 किलो बर्फी, 199 किलो मावा, 99 किलो पनीर जब्त किया। जब्त के बाद नमूने लिए, लेकिन जब्त माल को सील्ड नहीं किया। सैंपल लेने के बाद उसे ही सुपुर्द कर दिया।

- मुरैना के खाद्य विभाग ने दूध डेरियों से सैंपल लिए। सैंपल लेने के बाद पांच दिन के लिए लायसेंस निलंबित कर दिए। पांच दिन बाद क्या कार्रवाई, उसका ब्यौरा पेश नहीं किया। जिनके लायसेंस निलंबित किए, उन्होंने जवाब भी पेश नहीं किया।

- ग्वालियर के खाद्य विभाग ने 5 से लेकर 7 नवंबर के बीच मावा जब्त किया। ये मावा भिंड से आया था। जब्ती के बाद दो दिन देर से सूचना भेजी। भिंड ने भी दो दिन बाद सूचना को संज्ञान में लिया। नौ नवंबर को कार्रवाई के लिए पहुंचे, जहां पर मावा तैयार किया गया था। मिलावट के कारोबार को छिपाने के लिए पूरा मौका दे दिया।

-विदिशा जिले में दीपावली के दौरान अभियान नहीं चलाया गया। दो से तीन साल पुराना रिकॉर्ड पेश कर कार्रवाई बताई गई।

- अशोकनगर, दतिया, शिवपुरी, गुना की भी ऐसी ही स्थिति थी।

- इन सभी कारणों के चलते हाईकोर्ट ने खाद्य विभाग के अधिकारी व उनकी भूमिका पर सवाल खड़े किए। ऐसी तल्ख टिप्पणी की, जिससे अधिकारियों की सच्चाई सामने आ गई।

इस तरह से करनी थी कार्रवाई, पर कागजी खानापूर्ति की

- कलेक्टर एक टीम बनाए, जो दुग्ध उत्पाद केंद्र, दुकान पर सर्च करे।

-जहां पर अपमिश्रित सामान मिलता है, उन्हें तत्काल सील्ड किया जाए।

-रजिस्ट्रेशन भी निलंबित किए जाएं। बिना देर किए सैंपल जांच के लिए भेजे जाएं।

-अप मिश्रित दूध व अन्य उत्पाद बनाने वाले थोक व खेरीज विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

- खाद्य सुरक्षा विभाग ने कोर्ट के आदेश के पालन में कागजी कार्रवाई की, लेकिन मौके पर सक्रिय नहीं दिखे।

क्या है मामला

दरअसल उमेश कुमार बोहरे ने हाईकोर्ट में ग्वालियर चंबल संभाग में मिलावट के कारोबार को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि दोनों संभाग में नकली पनीर, घी, मावा तैयार किया जा रहा है। पूरे देश में इसकी आपूर्ति की जा रही है। इससे लोग बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन मिलावट का कारोबार रोकने में नाकाम है। कोर्ट ने जनहित याचिका का दिशा निर्देशों के साथ जनहित याचिका का निराकरण कर दिया, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद मुख्य सचिव ने कोई कदम नहीं उठाए।