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दादी ने घोंटा 5 दिन की बच्ची का गला, रात भर कंबल में छिपाकर बैठी, बहु से बोली- ‘बच्ची सो रही’

Crime News: पोते की चाहत में दादी ने पांच दिन की नवजात पोती का गला घोंट दिया। रात भर दादी उसे कंबल में छिपाकर बैठी रही। बहू से बोल दिया बच्ची सो रही है। दूसरे दिन बहू के मायके वालों को बच्ची बेजान दिखी तब दादी अस्पताल से सरक गई। 22 दिन बाद जांच और […]

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Crime News: पोते की चाहत में दादी ने पांच दिन की नवजात पोती का गला घोंट दिया। रात भर दादी उसे कंबल में छिपाकर बैठी रही। बहू से बोल दिया बच्ची सो रही है। दूसरे दिन बहू के मायके वालों को बच्ची बेजान दिखी तब दादी अस्पताल से सरक गई। 22 दिन बाद जांच और शव परीक्षण रिपोर्ट से खुलासा हो गया दादी ने अपने हाथों गला दबाकर नवजात पोती का कत्ल किया है।

गोलपाड़ा निवासी बलवीर चौहान की पत्नी प्रेमलता (56) ने पोते की चाह में हत्या कर दी। प्रेमलता ने बहू काजल (23) पत्नी विकास चौहान की इकलौती बेटी का अस्पताल में ही गला घोंट दिया। पिछले साल १० मई को मेडिकल रिप्रेंजटेटिव विकास से काजल की शादी हुई थी। 23 मार्च को कमलाराजा में काजल ने ऑपरेशन से बेटी को जन्म दिया। बच्ची दिव्यांग पैदा हुई। उसका बायां हाथ कोहनी से नहीं था। बेटी का जन्म सुनकर ससुराल में सन्नाटा हो गया। प्रेमलता पोता चाहती थी। तीन दिन तक उसने बच्ची को गोद तक नहीं लिया। फिर बहू की नजर बचाकर हत्या कर दी।

ऐसे किया कत्ल

26 मार्च की रात प्रेमलता (सास) अस्पताल में रुकी थीं। उन्होंने बच्ची को कंबल में ढंककर रखा था। कई बार मांगने पर भी बच्ची नहीं दी। प्रेमलता ने रात को कंबल के अंदर बच्ची का गला दबा दिया। दूसरे दिन मामा कुंअरपाल और मौसी अर्चना चंदेल ने जिद कर बच्ची छीनी तो वह बेजान थी। डॉक्टरों ने उसे मृत बताया और प्रेमलता अस्पताल से भाग गई।

(जैसा कि मृत बच्ची की मां काजल ने बताया)

हत्या में दादी गिरफ्तार

नवजात बच्ची की मौत के बाद उसकी मां और ननिहाल पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया था। शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर मौत होना पता चला। जांच में भी दादी ही दोषी निकली, उसे गिरफ्तार किया है। -अशोक जादौन, सीएसपी इंदरगंज सर्किल

वो दौर बीत चुका है, ये बेटियों का युग

नवजात ने अभी दुनिया भी नहीं देखी थी। वह नहीं जानती थी जिस दादी के हाथों में अपनेपन का अहसास कर रही थी, वह उसकी जान लेगी। जिस कंबल में वह गर्माहट का अनुभव कर रही थी, उसमें चीखें दबाने के लिए रखा है। आज के दौर में यह सोचना भी मुमकिन नहीं है। उस दौर की काली यादें तो अब सब भूल चुके हैं।

कल तक जिस क्षेत्र में लिंगानुपात गड़बड़ था वहां अब बेटियों ने अपनी मेधा से शिक्षा, व्यवसाय, प्रतियोगिता और खेल सहित हर क्षेत्र में परचम लहराया। बेटी को मार देना कानूनन ही नहीं सामाजिक अपराध भी है।

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