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चार माह के लिए बंद होने जा रहे हैं मांगलिक कार्य,उससे पहले जरूर कर लें यह उपाय,बदल जाएगी आपकी किस्मत

चार माह के लिए बंद होने जा रहे हैं मांगलिक कार्य,उससे पहले जरूर कर लें यह उपाय,बदल जाएगी आपकी किस्मत

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jaipur

चार माह के लिए बंद होने जा रहे हैं मांगलिक कार्य,उससे पहले जरूर कर लें यह उपाय,बदल जाएगी आपकी किस्मत

ग्वालियर। आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष को देवशयनी एकादशी 23 जुलाई को धूमधाम से मनाई जाएगी। जिसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई है। साथ ही चार माह के लिए मांगलिक कार्यों पर पूर्ण रूप से विराम लग जाएगा। पंडित राधेश्याम शर्मा ने बताया कि देवशयनी एकादशी का पुराणों में विशेष महत्व है और इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए सोने चले जाते हैं। इसी मास को चातुर्मास भी कहा जाता है।

देवशयनी एकादशी को पद्म एकादशी,आषाढ़ एकादशी और हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु पटेल लोक में निवास करते है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तक विष्णु भगवान उस लोक के लिए चले जाते है।

सभी पापों से मिलती है मुक्ति
पंडित सतीश सोनी ने बताया कि इन चार माह के दौरान मांगलिक कार्य, शादी-विवाह,उपनयन संस्कार और मांगलिक कार्य नहीं होते है। चार माह पूरे होने के बाद देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु जागते हैं। उसके बाद ही मांगलिक कार्य शुरू होते है। उन्होंने बताया कि आषाढ़ मास की एकादशी का व्रत सभी मनुष्यों को करना चाहिए। यह व्रत सब सिद्धियों को देने वाला और समस्त पापों का नाश करने वाला होता है। इस व्रत के करने से मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

ऐसे करे देवशयनी एकादशी व्रत
दशमी तिथि की रात्रि से ही देवशयनी व्रत को करने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। पंडित राधेश्याम शर्मा ने बताया कि दशमी तिथि की रात्रि का भोजन सूर्य अस्त होने से पूर्व में ही कर लेना चाहिए। यह व्रत दशमी तिथि से शुरू होकर द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक चलता है। सुबह जल्दी उठकर, नित्य क्रियाओं को करने के पश्चात स्नान करना चाहिए। उसके बाद भगवान विष्णु जी का पूजन करना चाहिए। पूजन करने के लिए धान के ऊपर कलश रखना चाहिए।

कलश को लाल वस्त्र से बांधना चाहिए फिर कलश का पूजन करना चाहिए। कलश की स्थापना के बाद उसके ऊपर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखकर पूजा करें। इसके बाद धूप,दीप और पुष्प से उनकी पूजा कर देवशयनी एकादशी व्रत कथा करना चाहिए। उपवास शुरू होने के बाद द्वादशी की सुबह सूर्य उदय के पश्चात ही उपवास को खोलना चाहिए।

सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश
23 जुलाई को आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष सोमवार की रात 10.25 बजे से सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश शुरू हो जाएगा। आपको बता दें कि कर्क राशि चंद्र की राशि है और सूर्य चंद्र का मित्र हैं। सूर्य अपने मित्र की राशि में प्रवेश होने से कई जातको को फल भी देता है। सूर्य आत्मा एवं पिता का कारक भी है। सूर्य शारीरिक ऊर्जा को नियमित करता है और मान सम्मान को भी बढ़ाता है। इसके साथ ही इच्छा शक्ति को भी जाग्रत करता है। इसलिए यह जातकों के लिए फायदेमंद भी है।

इन राशियों पर रहेगा प्रभाव
मेष-संतान की प्राप्ति होगी।
वृष-शुभ समाचार मिलेंगे,पुराने दोस्तों से भी मेलजोल होगा।
मिथुन-धन लाभ होने के योग।
कर्क-साधनों में वृद्धि होगी।
सिंह-खर्च बढ़ेंगे,जरूरत से ज्यादा खर्च न करे।
कन्या-हानि होगी,सावधान रहने की जरूरत है।
तुला-लाभ होगा,उन्नति के भी योग।


वृश्चिक-नौकरी का योग है।
धनु-लोागें से सम्मान मिलेगा।
मकर-स्वास्थ्य अच्छा होगा।
कुंभ-लाभ होगा।
मीन-वाहन चलाते समय सावधान रहे।