15 जुलाई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

111 करोड़ डुबो दिए, अब 191 करोड़ और क्यों? सांख्य सागर मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क स्थित सांख्य सागर झील में सीवर का पानी पहुंचने के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि जब पहले सीवरेज परियोजना पर खर्च किए गए 111 करोड़ रुपये का हिसाब और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं हुई, तो सरकार 191.24 करोड़ रुपये की नई राशि कैसे मांग सकती है।
2 min read
Google source verification
Sankhya Sagar

court hammer

ग्वालियर. शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क स्थित सांख्य सागर झील में सीवर का पानी पहुंचने के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि जब पहले सीवरेज परियोजना पर खर्च किए गए 111 करोड़ रुपये का हिसाब और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं हुई, तो सरकार 191.24 करोड़ रुपये की नई राशि कैसे मांग सकती है। कोर्ट ने नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) को निर्देश दिए कि वे स्वयं सीलबंद रिकॉर्ड का परीक्षण कर दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए 27 जुलाई को रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई भी इसी दिन होगी। सुनवाई के दौरान विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें झील में गिर रहे सीवर और कचरे को रोकने के लिए 191.24 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट की सिफारिश की गई थी। इस पर कोर्ट ने रिपोर्ट को चौंकाने वाली बताते हुए कहा कि पहले जिस सीवरेज लाइन और ट्रीटमेंट प्लांट पर 111 करोड़ रुपये खर्च किए गए, वे आज तक प्रभावी रूप से संचालित ही नहीं हुए। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना से जुड़ी अधिकारी अल्का उपाध्याय का हलफनामा बिना विधिवत अधिकृत प्रतिनिधित्व (वकालतनामा) के स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्हें स्वयं या अपने निजी अधिवक्ता के माध्यम से जवाब दाखिल करना होगा।

डिप्टी डायरेक्टर से पूछा- दबाव में हैं या कार्रवाई नहीं करना चाहते?
माधव टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर हरिओम ने कोर्ट को बताया कि पुराने अधिकारियों की जानकारी जुटाई जा रही है। इस पर कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में हो रहे पर्यावरणीय नुकसान के लिए मौजूदा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि वे दबाव में काम कर रहे हैं तो विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया जा सकता है। साथ ही उन्हें अपनी कार्यक्षमता साबित करने के लिए 15 दिन का अंतिम अवसर दिया गया।

सीएमओ को भी लगी फटकार
शिवपुरी नगर पालिका के सीएमओ यशवंत राठौर द्वारा पेश की गई तस्वीरों में सीवर का नाला झील में मिलता दिखाई दिया। जब कोर्ट ने निगरानी की रिपोर्ट मांगी तो वे कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि सीएमओ एसी कक्ष में बैठकर जिम्मेदारी अधीनस्थ कर्मचारियों पर नहीं डाल सकते। बाद में सीएमओ ने अदालत को भरोसा दिलाया कि भविष्य में वे स्वयं पूरे मामले की निगरानी करेंगे।