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18 साल से यहां किसके इंतजार में हैं राजीव गांधी!

भारत रत्न राजीव गांधी को ऐसे शख्स का इंतजार है, जो उनके18 सालों के इंतजार को ख़त्म कर दे।

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Shyamendra Parihar

Jan 07, 2016


ग्वालियर। भारत रत्न राजीव गांधी की मूर्ति को भी सियासत ने नहीं छोड़ा। राजीव गांधी की मूर्ति को नगर निगम द्वारा अठारह साल पहले ऑर्डर देकर बनवाया गया था। मूर्ति तैयार भी हो गई और मूर्ति का भुगतान भी हो चुका है।

इन अठारह सालों में सियासत ने कई दौर देखे। कांग्रेस की सरकारों के दिन लद गए और निगम और प्रदेश में कांग्रेस को लम्बे समय से सत्ता का सुख देखने को नहीं मिला। इस सियासत का नुकसान राजीव गांधी की मूर्ति को भी उठाना पड़ रहा है। मूर्ति 18 सालों से शहर में अपने लिए एक स्थान तलाश रही है, जबकि इस दौर में कई महापुरूषों की मूर्तियां शहर में स्थापित की गई। अब इसे मूर्तियों की सियासत न कहिए तो क्या कहें?


शहर में तीन तिराहों व चौराहों पर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और माधवराव सिंधिया जैसी हस्तियों की मूर्तियां लगनी थी। निगम ने वर्षों पूर्व राष्ट्रीय नेताओं और देशभक्तों की मूर्तियां लगाने का निर्णय लिया था। इसी के तहत निगम ने 17 दिसंबर 1997 को मूर्तियां बनवाने का ऑर्डर दिया। उस समय राजीव गांधी की मूर्ति फूलबाग चौराहा पर लगना थी, लेकिन भाजपा की परिषद ने यह स्थान बदलकर विश्वविद्यालय मार्ग पर कुलपति बंगले के सामने चौराहा पर लगाने की सहमति बनाई, लेकिन अभी तक यह मूर्ति लग नहीं सकी।

तीन मूर्तियों का दिया था ऑर्डर सबसे बड़ी मूर्ति माधवराव सिंधिया 11 फुट और इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की 9-9 फुट बननी थी। माधवराव सिंधिया की नदी गेट और इंदिरा गांधी की मूर्ति लेडिज पार्क में लग चुकी है। वहीं राजीव गांधी की मूर्ति बनकर तैयार रखी है। माधवराव की मूर्ति 11 लाख और इंदिरा और राजीव गांधी की मूर्ति 4-4 लाख की बनी हैं।

दो माह में बन गई थीं मूर्तियां
नगर निगम ने मूर्तिकार को दो माह में इन मूर्तियों को पूरा करने को कहा था, मूर्तिकार ने भी निगम के हिसाब से काम समय सीमा में करके दिखा दिया। इसके बाद भी आज तक राजीव गांधी की मूर्ति किसी भी तिराहे और चौराहों पर नहीं लग पाई।

"कई बार कांग्रेस कमेटी और पार्षदों के साथ कई पुराने महापौरों को ज्ञापन दे चुके है। अब फिर महापौर से इस संबंध में चर्चा की जाएगी।"
कृष्णराव दीक्षित, नेता प्रतिपक्ष

"राजीव गांधी की मूर्ति काफी समय पहले बनकर तैयार हो गई है। अब मूर्ति कब और कहां लगेगी इसका फैसला परिषद द्वारा ही किया जाएगा।"
मधु सोलापुरकर, जनसंपर्क अधिकारी नगर निगम

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