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जेब में रखे 2150 रू. और छोड़ दिया लाचार बुजुर्ग को लावारिस, देखिए कहीं ये व्यक्ति आपकी जान पहचान के तो नहीं….

जेब में रखे 2150 रू. और छोड़ दिया लाचार बुजुर्ग को लावारिस, देखिए कहीं ये व्यक्ति आपकी जान पहचान को तो नहीं....

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arun kumar sharma

जेब में रखे 2150 रू. और छोड़ दिया लाचार बुजुर्ग को लावारिस, देखिए कहीं ये व्यक्ति आपकी जान पहचान को तो नहीं....

नीरज चतुर्वेदी @ ग्वालियर


उनकी उम्र करीब 60 साल है। वे बीमार हैं और कुछ भी साफ-साफ बोल-सुन नहीं पा रहे। ट्रेन के सबसे महंगे एसी फस्र्ट क्लास में सफर कर रहे थे। कीमती व्हील चेयर पर बैठे थे और जेब में पड़े थे २१ सौ रुपए। यहां तक तो इस कहानी में कुछ भी अजीब नहीं लगता। इंसानों में खत्म होती जा रही संवेदना और रिश्तों की मौत का किस्सा इसके बाद शुरू होता है। उन्हें किसी अपने ने पूरे इंतजाम कर ट्रेन में यह कह कर बैठाया था कि ग्वालियर में कोई उन्हें लेने आएगा... लेकिन यहां कोच का अडेंडेंट उन्हें व्हील चेयर समेत प्लेटफॉर्म पर उतार कर कुली के हवाले कर गया। लंबे इंतजार के बाद भी इस बीमार, लाचार बुजुर्ग को लेने कोई नहीं आया। वह अपना जिसने इनका टिकट बनवाया था, शायद इन्हें लावारिस ही छोड़ देना चाहता था। उसने टिकट बनवाते वक्त न तो अपना पता दर्ज कराया न ही कोई फोन नंबर दिया। बुजुर्ग के पास भी पहचान का कोई दस्तावेज नहीं छोड़ा गया। बुजुर्ग को फिलहाल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके अपनों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।


छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के एचए-वन कोच से बुधवार की दोपहर अटेंडेंट ने व्हील चेयर पर बैठे एक बुजुर्ग यात्री को उतारा। उसने कुली को बताया कि इन्हें कोई लेने आएगा। कुली भीषण गर्मी में करीब आधा घंटे तक वृद्ध को लिए परिजनों के इंतजार में इधर-उधर घूमता रहा। जब कोई नहीं आया तो वह उन्हें लेकर डिप्टी एसएस के पास पहुंचा। बुजुर्ग से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनकी तबीयत खराब लग रही थी और वे कुछ बोल नहीं पा रहे थे। उन्हें एसी वेटिंग रूम में ले जाया गया। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन के एसी कोच के टीटी से संपर्क किया गया। उसने बताया कि यात्री का नाम अरुण कुमार है और वे निजामुद्दीन से ग्वालियर एचए-वन कोच की सीट ६ पर यात्रा कर रहे थे। पीएनआर नंबर से पता और नंबर की जानकारी ली गई तो सामने आया कि विंडो टिकट बनवाते वक्त ये जानकारियां नहीं दी गईं। आखिरकार डॉक्टर को बुलाकर बुजुर्ग की जांच कराई गई। आखिरकार उन्हें आरपीएफ के उपनिरीक्षक बृजेन्द्र सिंह जेएच अस्पताल में भर्ती कराया गया।


जेब में 2150 रुपए

वेटिंग रूम में पड़ताल के दौरान उनकी जेब से २१५० रुपए निकले। इसमें दो हजार का एक नोट और कुछ खुल्ले रुपए थे। आरपीएफ ने रुपए जमा कर लिए हैं। व्हील चेयर स्टेशन पर ही जमा करा दी। यात्री की पहचान के लिए स्टेशन मैनेजर ने कई प्रयास किए। उन्होंने उनका फोटो खीचकर साथियों के साथ कई गु्रपों में संदेश दिया ताकि अगर किसी के परिचित हों तो पता लग सके। जल सेवा कर रहे पंजाबी परिषद के सदस्यों से भी पूछा, लेकिन उनकी पहचान नहीं हुई।

टूटी-फूटी भाषा में बोले, एयरफोर्स में था
अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा है। वहां शहर के कई स्थानों के नाम बताए ताकि उन्हें कुछ याद आ जाए पर वे कुछ साफ नहीं बता पाए। बार-बार अस्पष्ट तौर पर,टूटी-फूटी भाषा में इतना भर कहते रहे कि उनका नाम अरुण कुमार शर्मा है, मुरार निवासी हैं और एयरफोर्स से रिटायर हैं।

पता लगा रहे हैं कि टिकट कहां से बना
अगर ट्रेन में कोई बीमार लाचार यात्री सफर कर रहा है तो टीटी को कंट्रोल के माध्यम से सूचना देना चाहिए थी। टीटी से जानकारी जुटाई जा रही है। टिकट कहां से और कैसे बना और उस पर मोबाइल नंबर क्यों नहीं है, इसकी जांच के लिए रेलवे के सीनियर अधिकारियों को लगाया गया है।
संजय सिंह नेगी, एडीआरएम झांसी मंडल