
जिला विकलांग पुनर्वास केन्द्र खुद हुआ विकलांग
ग्वालियर. जिला विकलांग पुनर्वास केन्द्र में फिजियोथेरेपिस्ट, मानसिक शिक्षक और साइक्लॉजिस्ट के अनुपस्थित रहने और अन्य स्टाफ की कमी के चलते यहां पर जिले भर से आने वाले विकलांगों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। जिला पुनर्वास केन्द्र में सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। ऐसे में जिला पुनवार्स केन्द्र को खुद ही उपचार की आवश्यक्ता बनी हुई है। जिला पुनर्वास केन्द्र में पदस्थ्य विशेषज्ञों को एक प्राइवेट संस्था में तैनात कर दिया गया है। जिसके चलते जिला पुनवार्स केन्द्र की व्यवस्थाएं ठप हो गई हैं। ऐसे में यहां पर न तो विकलांगों का समय पर उपचार हो पा रहा है और न ही उनकी काउंसलिंग हो पा रही है। हालांकि प्रबंधन द्वारा सप्ताह में मात्र एक दिन मंगलवार को मेडिकल बोर्ड लगाकर विकलांगों को उपचार दिलाए जाने की ओपचारिकता पूरी की जा रही है। ऐसे में जिला पुनवार्स केन्द्र विकलांगों के लिए हॉट इश्यू बनता जा रहा है।
जिला पुनवार्स केन्द्र में फिजियोथैरेपिस्ट के पद पर विक्रांत अवस्थी पदस्थ्य है। इसी के साथ ही मानसिक शिक्षक रजनी मूंदड़ा, साइक्लॉजिस्ट अजरा खान है जिनके द्वारा ही जिला पुनवार्स केन्द्र की पूरी व्यवस्थाएं संभाली जाती थी। लेकिन विगत माह स्नेहालय में हुई घटना के बाद कलेक्टर के आदेशानुसार विगत २८ सितंबर २०१८ को तीनों की ड्यूटी स्नेहालय में लगा दी गई। जिसमें से मानसिक शिक्षक रजनी मूंदड़ा, साइक्लॉजिस्ट अजरा खान की तो नियमित ड्यूटी स्नेहालय में ही लगी हुई है। ऐसे में वह जिला पुनर्वास केन्द्र में सेवाएं नहीं दे पा रही है। हालांकि विक्रांत अवस्थी जिला पुनर्वास केन्द्र में मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को सेवाएं देते हैं। लेकिन जिला पुनर्वास केन्द्र में जिले भर से दिव्यांग आते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों के नहीं मिलने के कारण विकलांगों को उपचार के लिए परेशान होना पड़ता है। कई विकलांग तो कई माह से उपचार के लिए भटकने को मजबूर बने हुए हैं। फिर भी जिला प्रशासन द्वारा जिला पुनर्वास केन्द्र की व्यवस्थाओं को बहाल किए जाने के संबंध में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
नहीं मिल पा रहे उपकरण भी- जिला पुनर्वास केन्द्र में विशेषज्ञों के अनुपस्थित मिलने के कारण जिले भर के विकलांगों को उपचार के लिए तो परेशान होना ही पड़ता है। इसके अलावा विकलांगों को उपकरणों का वितरण भी नहीं हो पा रहा है। क्योंकि केन्द्र में स्टाफ ही मौजूद नहीं रहता है। जिसके चलते विकलांगों को दिए जाने वाले उपकरण भी केन्द्र के कौने में धूल खा रहे हैं। ऐेस में विकलांगों को उपकरणों के लिए भी परेशान होते हुए देखा जा सकता है।
इंनवर्टर तक के नहीं इंतजाम- जिला पुनर्वास केन्द्र में अगर बिजली चली जाए तो उजाले तक की व्यवस्था के इंतजाम नहीं हैं। क्योंकि केन्द्र के पास न तो इंनवर्टर है और न ही जनरेटर लगा हुआ है। ऐसे में अगर बिजली चली जाए तो पूरे केन्द्र में अंधेरा पसर जाता है। जिसके चलते विकलांगों की सुरक्षा व्यवस्था का भी अभाव बना हुआ है। गर्मी के दिनों में तो बिजली चली जाने के बाद विकलांगों को परेशान होना पड़ता है। इसके अलावा अन्य सुविधाओं का भी अभाव बना होने के कारण जिला पुनर्वास केन्द्र की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे ही चल रही हैं।
शीघ्र होगा सुधार- फिजियोथेरेपिस्ट, मानसिक शिक्षक और साइक्लॉजिस्ट की ड्यूटी स्नेहालय में लगी होने के कारण यहां पर परेशानी आ रही है। विकलांगों की सुविधा को देखते हुए कलेक्टर को पत्र लिखकर स्टाफ वापसी की मांग की जा चुकी है। वहीं उन्होंने भी आश्वासन दिया है कि स्टाफ की वापसी करा दी जाएगी। अन्य स्टाफ की नियुक्ति के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जिला पुनर्वास केन्द्र की व्यवस्थाओं में शीघ्र ही सुधार करा लिया जाएगा।
एसएम अवस्थी- प्रशासनिक अधिकारी, जिला पुनर्वास केन्द्र
Published on:
09 Feb 2019 01:51 pm
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