
आज से जगमग होगा खुशियों का उत्सव, यह है शुभ मुहूर्त
ग्वालियर। उजियारे और मां लक्ष्मी का पांच दिनी उत्सव शुक्रवार से धनतेरस के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। दीप पर्व की यह चमक भाईदौज तक जारी रहेगी। इन पांच दिनों में महालक्ष्मी स्थापना के साथ-साथ उनकी आराधना भी होगी। घर-आंगन से लेकर सारे शहर में रोशनी का महारास होगा। एक दीप से जलकर दूसरा दीप रोशनी का संदेश देगा। पं.सतीश सोनी के मुताबिक इस महापर्व के पांच दिनों में धनतेरस, रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाईदौज के पर्व में शहरवासी सराबोर होंगे।
धनतेरस पर्व
धनतेरस पर्व की शुरूआत धनतेरस से होगी। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरि का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को धनतेरस या धन त्रयोदशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यम दीपदान और आरोग्य के देवता धनवंतरि का पूजन विधि-विधान से होता है। घरों को सजाकर द्वार पर शुभ का प्रतीक स्वास्तिक बनाते हैं। इसी दिन राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी मनता है।
रूप चौदस
रूप चौदस कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चौदस भी कहा जाता है। सूर्योदय से पहले स्नान कर रूप, यश और सौभाग्य की कामना के साथ लोग भगवान की पूजा करेंगे। इस दिन पारंपरिक उपटन लगाकर स्नान किया जाता है। कई परिवारों में पूर्वजों के लिए दीपदान करने की परंपरा भी बरसों से चली आ रही है। चौदस पर महिलाएं विशेष रूप से सजेंगी, संवरेंगी और रूप निखारेंगी। बाजारों में चूड़ी-कंगन और शृंगार सामग्री की बिक्री भी जमकर होती है।
दीपावली
कार्तिक अमावस का यह दिन महालक्ष्मी पूजन का दिन है। शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। घर-द्वार पर दीपक प्रज्जवलित किए जाते हैं। पूजन के बाद आतिशबाजी का दौर चलता है। कई समाजों में रात भर दरवाजे खुले रखे जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि खुले दरवाजे से धन की देवी लक्ष्मी हमारे घरों में प्रवेश कर हमें समृद्धि बनाती है।
गोवर्धन पूजा
दीपावली के अगले दिन पड़वा को गोवर्धन पूजा की परंपरा है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। पड़वा का दिन मेल-जोल का दिन भी है। लोग अपने रिश्तेदारों, परिचितों और मित्रों से मिलने जाते हैं। बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया जाता है। सुबह गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा की जाती है। पशु धन की पूजा का विशेष महत्व है। पड़वा को घरों और मंदिरों में अन्नकूट और छप्पनभोग के आयोजन होंगे।
भाई दूज
यह घर-घर का त्योहार है। इस दिन यम ने बहन यमुना को रक्षा का वचन दिया था, इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहा जात है। इस दिन बहनें भाइयों को घर बुलाकर भोजन करवाती हैं और भाई बहन को उपहार देते हैं। इसी दिन विश्वकर्मा पूजा भी होती है। कायस्थ समाज इस दिन कमल-दवात की पूजा करता है। यह पर्व दिन भर मनाया जाता है।
शुभ मुहूर्त
चर : शाम 5.02 से 6.32 बजे तक।
लाभ : रात 9.32 से 11.02 बजे तक।
प्रदोष काल : शाम 5.39 से रात 8.14 बजे तक।
वृषभ काल : शाम 6.51 से 8.47 बजे तक।
Published on:
25 Oct 2019 12:59 pm
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