
High court Gwalior
ग्वालियर. डॉक्टर पर्चे (प्रिसक्रिप्शन) पर दवाईयों के फार्मूले की जगह दवाई के ब्राण्ड का नाम लिख रहे हैं। इसको लेकर उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय, राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग सहित ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, मेडिकल काउंसिल ऑफ मध्यप्रदेश को नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। इसमें राज्य सरकार से जवाब तलब किया गया गया है।
युगलपीठ के जस्टिस शील नागू और जस्टिस गुरुपाल सिंह आहलुवालिया ने कहा, न्यायालय को यह अवगत कराया गया है कि मेडिकल स्टोर में गंभीर बीमारियों से संबंधित जेनेरिक दवाईयों का स्टॉक उपलब्ध नहीं रहता है। उच्च न्यायालय ने प्रशासन को आदेशित किया कि मेडिकल स्टोर में गंभीर बीमारियों से संबंधित संपूर्ण जेनेरिक दवाईयों की उपलब्धता भरपूर मात्रा में रहना चाहिण्, जिससे आमजन को जेनेरिक दवाईयां आसानी से उपलब्ध हो सके।
नियमों का हवाला देकर दायर की गई थी याचिका
जनहित याचिका में विभोर कुमार साहू ने बताया, मेडीकल काउंसिल ऑफ इंडिया के द्वारा इंडियन मेडिकल काउंसिल प्रोफेशनल कंडक्ट ऐटीकेट एंड इथिक्स रेग्यूलेशन-2002 में नियम 1.5 जोड़कर गजट 8 अक्टूबर-2016 से लागू कर यह नियम बनाया गया था कि सभी डॉक्टर अपना दवाई का पर्चा बनाते समय दवाईयों के ब्राण्ड का नाम नहीं लिख सकेंगे। वे सिर्फ जेनेरिक मेडिसिन लिखेंगे, यानी दवाई का फॉमूला लिखा जाएगा। आवेदक ने न्यायालय को इस बात से अवगत कराया कि नियम होने के बाद भी डॉक्टर दवाईयों के पर्चों में ब्राण्ड के नाम ही लिख रहे हैं और नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। जिससे आमजनता को आर्थिक हानि उठाना पड़ रही है।
कैंसर जैसी बीमारियों की दवा भी मिल सकेगी सस्ती
इससे यह फायदा होगा कि मरीजों को डॉक्टर के द्वारा लिखी गई दवाई जेनेरिक फार्म में मेडिकल से उपलब्ध होगी, जो कि अपने बॉण्ड मेडिसन के तुलना में करीब 100-200 प्रतिशत सस्ती होगी। याचिका में बताया गया, अगर कैंसर का इलाज जेनेरिक मेडिसिन से किया जाएगा तो वह ब्राण्ड नेम की दवाईयों से 10 से 15 लाख रुपए का खर्च आता है वहीं जेनेरिक दवाईयों से 50 हजार से एक लाख रुपए में ही यह इलाज हो सकता है।
Published on:
14 Oct 2020 08:46 pm
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
