
40 साल का दावा भी नहीं दिला सका मालिकाना हक (Photo Source- Patrika)
Court Order :ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सरकारी जमीन पर प्रतिकूल कब्जे (एडवर्स पजेशन) के आधार पर मालिकाना हक मांगने वाली सेकेंड अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने निचली दोनों अदालतों के फैसलों को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय से कब्जा होने का दावा पर्याप्त नहीं है।
रामकिशन (अब मृतक) ने दावा किया था कि उनके पिता पिछले 40–50 वर्षों से ग्राम गोसपुरा, ग्वालियर स्थित सर्वे नंबर 657 और 720 की भूमि पर कच्चा मकान बनाकर रह रहे थे, जिसे बाद में पक्का मकान में बदल दिया गया। बिजली-पानी कनेक्शन और संपत्ति कर की रसीदों के आधार पर उन्होंने प्रतिकूल कब्जे से स्वामित्व सिद्ध करने की मांग की थी।
राज्य शासन ने जवाब में कहा कि भूमि सर्वे नंबर 657 एवं 720, ग्राम गोसपुरा (ग्वालियर) की शासकीय नजूल भूमि है, जिसमें एक हिस्सा कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। साथ ही एम.पी. लैंड रेवेन्यू कोड की धारा 248 के तहत नोटिस भी जारी किया गया था। हाईकोर्ट ने पाया कि प्रस्तुत दस्तावेज वर्ष 1996 के बाद के हैं और इससे पूर्व कब्जे का कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया। अदालत ने कहा कि प्रतिकूल कब्जा सिद्ध करने के लिए यह साबित करना आवश्यक है कि कब्जा खुला, निरंतर और वास्तविक मालिक की जानकारी में शत्रुतापूर्ण रूप से रहा हो। ऐसा कोई प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है। दोनों निचली अदालतों द्वारा दिए गए तथ्यों के समवर्ती निष्कर्षों में कोई कानूनी त्रुटि या विकृति न पाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 100 सीपीसी के तहत हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। परिणामस्वरूप दूसरी अपील खारिज कर दी गई।
Published on:
05 Mar 2026 08:46 am
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