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पति और बेटे को खोने के बाद भी नहीं टूटे हौसले, दस हजार लोगों को सिखा चुकीं योग

ग्वालियर की सुमन अग्रवाल को मिल चुके योग रत्न, योग सेवा सम्मान

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पति और बेटे को खोने के बाद भी नहीं टूटे हौसले, दस हजार लोगों को सिखा चुकीं योग

पति और बेटे को खोने के बाद भी नहीं टूटे हौसले, दस हजार लोगों को सिखा चुकीं योग

ग्वालियर.

जीवन में कई वाकये ऐसे आते हैं, जब इंसान टूट जाता है। वह अपने लक्ष्य से भटक जाता है। अपने मिशन को दरकिनार रख समय और परिस्थिति के अनुसार दूसरे सपने संजोने में लग जाता है। लेकिन ग्वालियर की योगाचार्या सुमन अग्रवाल ने 14 साल की उम्र में जो सपने देखे आज भी वे अपने पति और बेटे को खोने के बाद भी वही हैं। वह अभी तक 10 हजार से अधिक लोगों को नि:शुल्क योग सिखा चुकी हैं। प्रदेश भर में योग शिविर लगा चुकी हैं। उन्हें बाबा रामदेव ने प्रदेश में सबसे अधिक योग शिविर लगाने के लिए योग सेवा अवॉर्ड से सम्मानित किया। उन्हें योग रत्न सहित कई अवॉर्ड मिल चुके हैं।

कुछ दिन दुख हुआ फिर लगा समाज के लिए जीना है
सुमन ने बताया कि दो साल पहले ही बेटा बीमारी के कारण चल बस और उसके चार साल पहले पति। कुछ समय ऐसा लगा कि मेरी जिंदगी खत्म हो गई हो, लेकिन अगले ही पल लगा कि मुझे समाज के लिए जीना है। उठकर खड़ी हुई और योग सिखाना शुरू किया। मैंने केवल कोरोना काल में ही 600 लोगों को योग सिखाया।

पहले कॉलोनी और सोसायटी में लगाए फ्री योग शिविर
मैंने 2002 में जीवाजी यूनिवर्सिटी से योग में पीजी डिप्लोमा किया। इसके बाद शहर की कॉलोनी और सोसायटी में फ्री योग शिविर लगाए। 2004 में मैंने जीवाजी यूनिवर्सिटी में बाबा रामदेव जी को सुना और हरिद्वार जाकर योग का कोर्स किया। वहीं से मुझे एक प्लेटफॉर्म मिला। पहले मुझे योग जिला प्रभारी बनाया गया। 2010 में प्रदेश का प्रभार दे दिया गया। आज मैं उसका निर्वहन कर रही हूं।

डॉक्टर ने बताया ऑपरेशन, योग से ठीक कर लिया
मैंने 14 साल की उम्र में यह सोच लिया था कि मुझे लोगों को योग सिखाना है। उसके पीछे की भी एक कहानी है। 10वीं क्लास में मुझे कफ की शिकायत हुई। डॉक्टर को दिखाया तो कहा नाक में मांस बढ़ा है। ऑपरेशन करना पड़ेगा। पापा ने प्राकृतिक चिकित्सा के साथ योग क्रियाएं कराई। इससे मैं ठीक हो गई। तभी से इसे अपना विजन और मिशन बना लिया।

पूरी तरह फिट हैं 65 साल की सुमन
65 साल की सुमन अग्रवाल महज छह घंटे सोती हैं। संयमित भोजन करती हैं। आज भी वह पूरी फिट हैं। तीन खंड ऊपर चढऩा हो या पांच किमी की दूरी नापनी हो। उन्हें दिक्कत नहीं होती। वे नि:शुल्क चिकित्सा भी करती हैं। छह घंटे से अधिक समय योग करने और सिखाने में देती हैं।