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ब्रांडेड सीमेंट में सस्ता मिलाकर बेचने का धंधा पकड़ा, एक बोरी पर 50 रुपए का होता था फायदा

बोरियों पर लिखा मिला नॉट फॉर सेल...........

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fake cement selling in gwalior

ब्रांडेड सीमेंट में सस्ता मिलाकर बेचने का धंधा पकड़ा, एक बोरी पर 50 रुपए का होता था फायदा

ग्वालियर. ब्रांडेड सीमेंट के नाम पर मिलावट का सीमेंट बेचने का गोरखधंधा पकड़ा गया है। कारोबार पिछले करीब तीन महीने से वैष्णोपुरम, हजीरा में चल रहा था। गोदाम से जो बोरियां मिली हैं उन पर नॉट फॉर सेल का ठप्पा भी लगा है। इससे जाहिर है कि कारोबार में किसी बड़े ठेकेदार की सांठगांठ भी हो सकती है। क्योंकि नॉट फॉर सेल का ठप्पा कारखाने से उन्हीं बोरियों पर लगाया जाता है जो थोक में सीधे बड़े निर्माण की साइट पर भेजी जाती हैं। वह बोरियां ठग के गोदाम में कैसे पहुंची पकड़े गए मिलावट खोर से पूछा जा रहा है।

पुलिस ने बताया अल्ट्रा टै्रक सीमेंट में कमजोर क्वालिटी का सस्ता सीमेंट मिलाकर बेचने का कारोबार रामकुमार खटीक निवासी अनुपम नगर कर रहा था। उसने धंधे के लिए वैष्णोपुरम कॉलोनी में रामसेवक का गोदाम किराए पर ले रखा था। इसमें रामकुमार अल्ट्रा टै्रक सीमेंट के अलावा सस्ते सीमेंट की बोरियां भी मंगाकर रखता था। फिर गोदाम बंद कर ब्रांडेड सीमेंट की बोरियों से 5 से 7 किलो सीमेंट निकालता था, उसमें सस्ता सीमेंट मिलाकर बोरियों को फिर पैक कर उन्हें ब्रांडेड के नाम से बाजार में खपाता था। मिलावटखोरी के लिए रामकुमार ने कुछ मजदूर भी दहाड़ी पर रखे हुए थे। करीब तीन महीने से रामकुमार का धंधा जोरों से चल रहा था। किसी तरह सीमेंट में मिलावट खोरी की भनक अल्ट्रा ट्रैक कंपनी को लग गई। कंपनी ने अपने स्तर पर पड़ताल कर रामकुमार का ठिकाना तलाश लिया। गुरुवार को हजीरा थाने पहुंचकर पुलिस को बताया कि सीमेंट में फर्जीवाडे का धंधा पकडऩा है साथ चलो। मौके पर पहुंचकर गोदाम खुलवाया तो उसमें करीब 200 बोरियां अल्ट्रा टै्रक और सस्ते सीमेंट की मिलीं। उनमे से सीमेंट निकालने और भरने के लिए इस्तेमाल होने वाली कुप्पी और दूसरे औजार भी मिले।

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नॉट फॉर सेल की बोरियां कैसे आईं, सवाल पर चुप्पी साध गया कारोबारी
गोदाम की तलाशी में पुलिस को नॉट फॉर सेल लिखी सीमेंट की बोरियां मिली हैं, इसे देखकर उसका माथा ठनक गया है। क्योंकि यह ठप्पा सीमेंट कंपनी उन लोगों के ऑर्डर पर लगाकर देती है जो थोक में हजारों बोरी एक साथ खरीदने की बुकिंग करते हैं। आशंका है कि रामकुमार का संपर्क किसी ऐसे ठेकेदार या उसके कर्मचारियों से है जो पुल, डैम या सडक़ निर्माण के ठेके से जुड़े हैं। कंपनी से बोरियां उनके गोदाम में रवाना की गई हैं, लेकिन सही ठिकाने पर पहुंचने की बजाए सीमेंट की खेप में से सैकडों बोरियां चोरी से रामकुमार के गोदाम पर भी पहुंच रही हैं। इससे जाहिर है कि धंधे में उसके साथ कुछ और लोग भी शामिल हैं। इस बारे में मास्टरमाइंड रामकुमार खुलासा नहीं कर रहा है।

ग्राहक बनकर बुलाया, बोरी पर 50 रुपए का मुनाफा
पुलिस ने बताया कि गोदाम संचालक को रंगे हाथ पकडऩे के लिए ग्राहक बनकर उससे सीमेंट खरीदने के लिए डील की, रामकुमार से कहा कि थोक में सीमेंट चाहिए है तो वह लालच में गोदाम पर आ गया उसे दबोच कर गोदाम खुलवाया तो फर्जीवाड़े का धंधा पकड़ा गया। पूछताछ में रामकुमार ने बतााया कि मिलावटखोरी के धंधे में एक बोरी पर उसे करीब 50 रुपए का मुनाफा होता था। वैसे सीमेंट बेचने पर सिर्फ कुछ रुपए कमीशन मिलता है।

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पूछताछ में मिलेगा ठप्पे की बोरियों का लिंक
सीमेंट में मिलावट खोरी का धंधा पकड़ा गया है, कारोबार में गोदाम संचालक को हिरासत में लिया है। उसके गोदाम में नॉट फॉर सेल का ठप्पा लगी बोरियां कैसे आती थीं इस बारे में पूछताछ की जा रही है। उम्मीद है कि मिलावटखोरी के कारोबार में नया लिंक सामने आएगा।
आलोक परिहार, हजीरा टीआई