16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

परिवार ने कमरे में बंद किया, मैं दीवार फांदकर दौड़ने गई , अपने दम पर पहलवानी में बनी ‘रानी’

सपना देखो, अपने मन की सुनो, चुनौतियों से डरे नहीं, जीत आपकी ही होगी....घुटने की इंजरी देख डॉक्टर ने कुश्ती से रोका, मैं खेलती गई....

2 min read
Google source verification
wrestler-rani-rana.jpg

Female wrestler

ग्वालियर/भोपाल। जिस घर में कुश्ती देखने तक की इजाजत न हो, वहां से अपनों की चुनौतियां का सामना कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान कायम की। ग्वालियर की महिला पहलवान रानी राणा उस घर से हैं, जहां महिलाओं को दंगल देखने की इजाजत नहीं थी। उनकी पांच बुआ ने स्कूल का मुंह तक नहीं देखा, लेकिन रानी कुश्ती लड़ना चाहती थी। उन्होंने घर में संघर्ष किया, बाहर वालों को जवाब दिया और उसी दंगल में पुरुषों को परास्त किया, जहां महिलाएं देखने जाने से घबराती थीं। वह नेशनल रेसलिंग में गोल्ड मेडल जीत पहलवान बनीं।

35 शोध प्रकाशित हुए

मैंने अपना अनुसंधान करेले के पौधे पर किया। यह बिल्कुल नया विषय था। अनुसंधान के दौरान करेले के पौधे के औषधीय गुणों के वैज्ञानिक आधार तत्वों की खोज की और ऊतक संवर्धन के जरिए पहली बार करेले के पौधे तैयार किए। इसके बारे में अनेक अन्तरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय, शोध पुस्तिकाओं व संगोष्ठियों में प्रस्तुत किया। इसको लेकर अब तक सात पुस्तकें व 35 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।

कमरे में बंद किया, मैं दीवार फांदकर दौड़ने गई

रानी ने बताया, मेरा मन कुश्ती लड़ने का हुआ। बुआ ने आपबीती बताकर डरा दिया, लेकिन मैंने सपने नहीं टूटने दिए। कुछ समय बाद पापा ग्वालियर आ गए। वहां लड़कों को दौड़ते देखा। मैंने भी दौड़ना शुरू किया। भाइयों ने देखा तो कमरे में बंद कर दिया। मैं चारदीवारी लांघकर दौड़ने जाने लगी।

मेडल किए अपने नाम

इंदौर एकेडमी में मैंने वे टेक्निक सीखीं, जो पहले नहीं सीख पाई थी। कोच अजय वैष्णव के सानिध्य में 2016 में जूनियर में ब्रांज मेडल, 2017 सीनियर में ब्रांज, 2018 और 2019 में भी ब्रांज मेडल जीता। 2020 में मैंने ब्रांज, सिल्वर और गोल्ड मेडल अपने नाम किए।

दंगल से इकट्ठे किए पैसे

कुश्ती खेलने की इच्छा देख मां राजी हुईं और उन्होंने पापा और भाइयों को मनाया। पहले मैंने गांव में खेला फिर संभाग, स्टेट और नेशनल। मैंने भोपाल एकेडमी में प्रैक्टिस की। स्टेट में तो मेडल ले आई, लेकिन नेशनल में रह गई। मैंने दंगल खेल पैसे इकट्ठे किए और इंदौर एकेडमी में एडमिशन लिया। सन् 2019 में घुटने में इंजरी हो गई। डॉक्टर ने कुश्ती लड़ने से मना किया लेकिन मुझे कुश्ती लड़ना थी। मथुरा में दंगल खेल एक लाख का चेक जीती। इसके अलावा नेशनल खेलकर ब्रांज और सिल्वर मेडल अपने नाम किए। मैंने सर्जरी कराई। वर्तमान में मेरे एल्बो में माइनर फ्रैक्चर है।