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ग्वालियर में 500 करोड़ का एयरपोर्ट: सवा दो साल में जयपुर, पुणे, कोलकाता, जम्मू, हैदराबाद और इंदौर की फ्लाइट्स बंद, अब दिल्ली-मुंबई पर भी संकट

500 करोड़ की लागत से बने राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयर टर्मिनल की भव्यता और चमक-दमक के पीछे एक कड़वी हकीकत छिपी है। आलीशान एयरपोर्ट आज सूने रनवे और उड़ानों के टोटे से जूझ रहा है। अब तक आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण शहरों की उड़ानें शुरू होने के कुछ समय बाद ही बंद हो चुकी हैं

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₹500-crore airport

ग्वालियर. 500 करोड़ की लागत से बने राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयर टर्मिनल की भव्यता और चमक-दमक के पीछे एक कड़वी हकीकत छिपी है। आलीशान एयरपोर्ट आज सूने रनवे और उड़ानों के टोटे से जूझ रहा है। अब तक आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण शहरों की उड़ानें शुरू होने के कुछ समय बाद ही बंद हो चुकी हैं और अब यह भव्य एयरपोर्ट सिर्फ तीन रूटों पर सिमट कर रह गया है। पिछले सवा दो साल में जयपुर, पुणे, कोलकाता, जम्मू, हैदराबाद और इंदौर जैसी महत्वपूर्ण फ्लाइट्स एक-एक कर बंद हो चुकी हैं। अब यही संकट दिल्ली और मुंबई रूट पर भी मंडरा रहा है, जहां आगामी जुलाई महीने से फेरे कम होने की आशंका है।

50% भी यात्री नहीं…

मई महीने में अकासा एयर द्वारा शुरू की गई दिल्ली फ्लाइट (सप्ताह में तीन दिन) में महज 1044 यात्रियों ने सफर किया, जो कुल क्षमता का 50 फीसदी भी नहीं है। वहीं, मई में मुंबई, बेंगलुरु और दो दिल्ली की फ्लाइट्स को मिलाकर कुल 18,616 यात्री ही मिल सके।

उड़ानें बंद होने की 5 बड़ी वजहें

-अव्यावहारिक टाइमिंग : दिल्ली-इंदौर जैसे रूटों की समय सारिणी ऐसी है कि कारोबारी सुबह जाकर शाम को लौट नहीं सकते।
-सड़क और रेल का मजबूत विकल्प: वंदे भारत, शताब्दी और एक्सप्रेस-वे जैसी तीव्र व सस्ती कनेक्टिविटी के कारण लोग हवाई सफर से बच रहे हैं।
-महंगा किराया (फ्लेक्सी फेयर): पीक सीजन में ग्वालियर से किराया इतना बढ़ जाता है कि लोग दिल्ली या नजदीकी एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़ना किफायती समझते हैं।
-लोकल फीडर ट्रैफिक की कमी: भिंड, मुरैना, शिवपुरी और दतिया जैसे अंचल के यात्रियों को एयरपोर्ट तक लाने के लिए कोई मजबूत ट्रांसपोर्ट सिस्टम नहीं है।
-व्यावसायिक नीतियां: यात्री भार कम होने पर विमानन कंपनियां तुरंत रूट बदल देती हैं, जिससे व्यापारिक संगठनों के साथ समन्वय की कमी दिखती है।

प्रयास जारी हैं…
फ्लाइटों को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन फिलहाल यात्री काफी कम मिल रहे हैं। मई में दिल्ली के लिए सबसे कम पैसेंजर लोड रहा। ऐसी ही स्थिति रही तो जुलाई से दिल्ली और मुंबई की उड़ानों के फेरे कम हो सकते हैं।

लोकेश कुमार यादव, डायरेक्टर, ग्वालियर एयरपोर्ट

एक्सपर्ट
खराब प्लानिंग के कारण उड़ानें बंद हो रही हैं। ग्वालियर जैसे शहर के लिए शुरुआत में 180 सीटों वाली बड़ी बोइंग फ्लाइट्स के बजाय छोटे विमान चलाए जाने चाहिए। अभी दिल्ली-बेंगलुरु के लिए दो-दो उड़ानें चल रही हैं, जिससे पैसेंजर बंट रहे हैं। सही रणनीति से फ्लाइट्स चलाई जाएं तो यात्रियों की कमी नहीं होगी।
सुदर्शन झंवर, अध्यक्ष, क्रेडाई ग्वालियर