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लट्ठमार ब्रज होली और पंथी डांस ने मचाया धमाल

तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन मध्यप्रदेश के बधाई और नोरता नृत्य, हरियाणा का फाग एवं धमाल नृत्य, उत्तरप्रदेश की लठ्ठमार ब्रज होली और छत्तीसगढ़ के पंथी डांस की प्रस्तुति दी गई।

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लट्ठमार ब्रज होली और पंथी डांस ने मचाया धमाल

ग्वालियर. अलग-अलग प्रांतों की डे्रसेस में सजे कलाकार, उनके नृत्य की प्रस्तुति सभी कुछ लुभा रही थी। अवसर था नागपुर के दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान की ओर से आयोजित लोक नृत्य भारत भारतीय उत्सव का। जिसका शुभारंभ सोमवार से गोविंदपुरी स्थित भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान के ऑडिटोरियम में किया गया। तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन मध्यप्रदेश के बधाई और नोरता नृत्य, हरियाणा का फाग एवं धमाल नृत्य, उत्तरप्रदेश की लठ्ठमार ब्रज होली और छत्तीसगढ़ के पंथी डांस की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में आईआईएचएम के प्रिंसिपल एमके दास, प्रोफेसर सुदेशना बाबू नोडल ऑफिसर आईआईटीटीएम गोवा उपस्थित रहे।
मध्यप्रदेश बुंदेलखंड के प्रसिद्ध बधाई नृत्य को यहां जन्म, शादी, तीज त्योहार जैसे शुभ अवसरों पर वहां के पुरुष और महिलाओं द्वारा साथ में किया जाता है। झीका-माझिरा, नगडिय़ा ढपला एवं घरों में पीने के लिए उपयोग होने वाला लोटा भी इस नृत्य वाद्य यंत्र के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसकी प्रस्तुति छात्र-छात्रों द्वारा जन्म लिए रघुराई, मची अवध में बधाई... पर परफॉर्म किया गया। साथ ही नवरात्र के समय कन्याओं द्वारा देवी मां की आराधना के लिए किया जाने वाले नृत्य की प्रस्तुति भी हुई। इसमें कन्याओं ने सर पर जलता हुआ छिद्र युक्त घड़ा रखकर प्रस्तुति दी।
हरियाणा का फाग नृत्य जो होली के दूसरे दिन महिलाओं एवं पुरुषों द्वारा किया जाता है। इसमें दिखाया गया कि महिलाएं पुरुषों से उपहार एवं आभूषण की मांग करती हैं न देने पर रूठने की धमकी देती हैं। इसकी प्रस्तुति हरियाणा से आये ग्रुप ने की। इसके अलावा महेंद्रगढ़ एवं रेवाड़ी क्षेत्र के दूसरे लोकप्रिय हरियाणवी नृत्य धमाल की प्रस्तुति भी हुई। यह किसानों द्वारा इंद्र को रिझाकर बारिश कराने एवं अच्छी बारिश होने के बाद फसल के पकने पर किया जाता है।
नृत्य से दिखाई घासीदास की महिमा : ब्रज की लट्ठमार होली को नृत्य के जरिए प्रस्तुत किया गया। इस डांस की विशेषता यह है कि आज भी होली के समय ब्रजवासी ढाल और डंडा लेकर बरसाना जाते हैं। इसके अलावा कृष्ण और राधा की कथाओं पर आधारित कथानक मयूर नृत्य की उत्तरप्रदेश से आए कलाकारों ने प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पंथी नृत्य की प्रस्तुति में गुरु घासीदास की महिमा के बारे में
बताया गया।