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कर्तव्य का पालन करने से धर्म का बोध होता है, जो ईश्वर के करीब पहुंचाता है

यह बात छत्री मैदान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे कथा वाचक कनकेश्वरी देवी ने कही।

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pravachan

कर्तव्य का पालन करने से धर्म का बोध होता है, जो ईश्वर के करीब पहुंचाता है

ग्वालियर। कर्तव्य का पालन करना हमारा प्रमुख धर्म है। कर्तव्य पालन करते समय कर्मवाणी का जाप करते रहना चाहिए, क्योंकि जब मनुष्य कर्तव्य का ठीक तरीके से पालन करता है तब उसे धर्म का बोध हो जाता है। यहीं धर्म मनुष्य को ईश्वर के करीब पहुंचता है। जो मनुष्य कर्तव्यों का पालन नहीं करता है उस पर ईश्वर की कृपा नहीं होती है। यह बात छत्री मैदान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे कथा वाचक कनकेश्वरी देवी ने कही।

उन्होंने कहा कि मंदिरों में भगवान और संतों के पास इतनी ताकत होती है कि हर किसी का कल्याण कर सकें। मंदिर में भगवान और संतों के पास हर कोई जाता है लेकिन इसके बाद भी हर किसी का कल्याण नहीं हो पाता है, क्योंकि इसका कारण है कि हम अपने कर्तव्यों से विमुख हो जाते हैं। हम मंदिर एवं संतों के पास जाने के साथ ही हम सभी को हमारे कर्तव्यों को देखना चाहिए हैं। भगवान भी नियमों के बंधन में बंधे है इसलिए वह भी हम पर कृपा करने से पहले हमारे कर्तव्यों को देखते हैं।

बाहर कमीं है न भीतर कमीं है
उन्होंने बाहरी और भीतरी शक्तियों के बारे में बताते हुए कहा कि न तो मनुष्यों के शरीर के भीतर शक्ति की कमी है और न ही बाहर शक्ति की कमी है। मनुष्य के शरीर के भीतर आत्मा है। आत्मा परमात्मा का रूप है इसलिए उसमें शक्ति की कोई कमीं नहीं है। बाहर साधु संत और तपस्वी हैं, साधु तपस्वी ऐसे है जो पूरी अपनी शक्तियों से पूरी दुनिया को चकित कर दें। ऐसे साधु हिमालय की गुफाओं में तपस्या करते हैं, ऐसे संत कुंभ में आते हैं। हम में से अधिकांश लोगों ने ऐसे संतों के दर्शन किए हैं। दर्शनों के बाद भी हम उनकी कृपा नहीं पाते हैं। इसका कारण है हमारे अंदर शक्तियों को धारण करने की क्षमता नहीं है। हमारे अंदर यह क्षमता इसलिए नहीं है, क्योंकि हमने धर्म को धारण नहीं कर रहे हैं। जो धर्म को धारण करेगा वहीं शक्तियों को धारण करेगा। शक्तियों को मनुष्य तभी धारण कर सकता है जब वह अपने कर्तव्य का ठीक से पालन करें और जो समय मिलता है उसमें ईश्वर का जाप करें। क्योंकि मनुष्य का जन्म धर्म को ही धारण करने के लिए ही हुआ है।

अचलेश्वर महादेव अचल हैं, उन्हें कोई हटा नहीं सका
उन्होंने कहा कि हर मंदिर में भगवान होता है और वह कई जगह हमें अपने प्रमाण भी देता है। उन्होंने अचलेश्वर महादेव भगवान का उदाहरण देते हुए कहा कि वह अचलनाथ हैं, बीच सडक़ पर विराजमान है। लोगों ने उन्हें सडक़ से हटाने के लिए कितने प्रयास किए, लेकिन कोई भी उन्हें डिगा नहीं सका। मशीनों से भी लोगों ने उन्हें हटाने का प्रयास किया, लेकिन इसके बाद भी कोई उनका छोर नहीं पा सका। अचलेश्वर महादेव मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों लोग आते हैं, लेकिन इसके बाद भी लोग उनकी शक्तियों को अनुभव नहीं कर पाते हैं। इसका कारण है कि हमारे अंदर शक्तियां नहीं है जो भगवान की शक्तियों और उनको पहचान सकें। इस मौके पर पूर्व मंत्री मायासिंह, महापौर विवेक शेजवलकर, पूर्व साडा अध्यक्ष जयसिंह कुशवाह सहित कई लोग मौजूद रहे।