
Food restaurant
ग्वालियर। शहर के होटल और रेस्टोरेंट की रसोईघरों में भी अब आधुनिक तकनीक का बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां अपनाई जा रही मॉडर्न तकनीक और आधुनिक उपकरणों के उपयोग से बड़ा मात्रा में और कम समय में भोजन बनाना संभव हो पा रहा है। वहीं ये उपकरण भोजन को स्वादिष्ट भी बना रहे हैं। इन ऑटोमैटिक मशीनों के इस्तेमाल से 100 से अधिक लोगों की ग्रेवी घंटे भर में और डो मशीन में 12 से 15 मिनट में 100 लोगों का आटा गूंथा जा रहा है। शहर में करीब 50 से अधिक बड़े होटल और 100 से अधिक रेस्टॉरेंट हैं।
स्टीमर में 100 से 200 किलो चावल बना रहे
निजी होटलों के जनरल मैनेजर प्रीतम खन्ना और मैनेजर अमित पांडे ने बताया कि होटल-रेस्टोरेंट में व्यंजनों को पकाने के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। इन मशीनों से कम समय पर अच्छी डिश बनकर मिल जाती है। कस्टमर फ्रेंडली सर्विस को ध्यान में रखते हुए मशीनों की जरूरत महसूस की जा रही है। बड़े-बड़े स्टीमर में 100 से 200 किलो चावल तैयार किए जा रहे हैं। इन मशीनों से हाइजैनिक फूड भी मिलता है। ऐसे फ्रायर आ रहे हैं जिनमें फ्रेंच फ्राइज बन जाते हैं और तवा रोटी मशीनों से ही बनाई जा रही है।
बाहर के खाने ने बढ़ाया चलन
बाहर जाकर खाना खाने का चलन शहर में तेजी से बढ़ रहा है। यही कारण है कि नए होटल और रेस्टारेंट खुल रहे हैं। खाना बनाने का ज्यादातर काम ऑटोमैटेड मशीनों से हो रहा है। कितनी मात्रा में मसाले डालने हैं, यह सब कम्प्यूटराइज्ड मशीन बता देती है।
परंपरागत किचन भी चल रहे
30 प्रतिशत होटल और रेस्टॉरेंट में आधुनिक किचन लगे हैं। 70 प्रतिशत में परंपरागत किचन चलते हैं। उनमें मशीनों का इस्तेमाल कुछ कामों के लिए होता है। वहीं अधिकांश काम शेफ अपने हाथों से करते हैं।
ये हैं फायदे
-सारा काम ऑटोमैटिक होता है।
-समय कम, उत्पादन ज्यादा।
-बर्तनों की झंझट नहीं होती।
-कम स्टाफ में काम।
-साफ-सफाई रखना आसान।
-डेढ़ से 10 लाख रुपए तक कीमत।
-दुर्घटना की संभावना में कमी।
-वेस्टेज कम होने के साथ बढ़िया स्वाद।
Published on:
30 May 2023 12:24 pm
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