
शिवपुरी। जिला पंचायत शिवपुरी की अध्यक्ष रहीं जूली आदिवासी को शिवपुरी जिले के नेताओं ने पांच साल तक रबर स्टांप की तरह इस्तेमाल किया और फिर दूध में गिरी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया। सर्वविदित है कि जूली को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने में अहम भूमिका पूर्व विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने निभाई थी तथा जिला पंचायत के सभी कार्यों में बढ़-चढकऱ सहयोग भी किया, लेकिन अब वे यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि हमने तो 6 माह बाद जूली को कोलारस के पूर्व विधायक रामसिंह यादव को ही सौंप दिया था, क्योंकि वो उन्हीं के फार्म हाउस की महिला कर्मचारी थी। साथ ही उन्होंने विधायक पुत्र पर जूली की पट्टे वाली जमीन को हड़पने का आरोप लगाया। वहीं कोलारस विधायक महेंद्र यादव ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि हमने जूली की पट्टे की जमीन अपने नाम नहीं करवाई। इन हालातों के बीच आदिवासियों के लिए काम करने वाले एकता परिषद के जिला संयोजक का कहना है कि आदिवासी को तो नेता अपने मोहरे की तरह इस्तेमाल करते हैं और उन्हें उनके ही हाल पर छोडकऱ अपना फायदा उठा लेते हैं।
जूली का पांच ***** राजनीतिक सफर कुछ ऐसा रहा
50 रुपए प्रति बकरी के हिसाब से इन दिनों जंगल में सुबह से देर शाम तक गुजारने वाली शिवपुरी की वर्ष 2005 से 2009 तक जिला पंचायत अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त) रहीं जूली आदिवासी के राजनीतिक पांच ***** सफर पर यदि नजर डालें तो कुछ यह सामने आता है-जूली आदिवासी व उसका पति मांगीलाल आदिवासी, कोलारस के पूर्व विधायक रामसिंह यादव के फार्म हाउस पर कर्मचारी होने के साथ ही वहीं पर निवास भी करते थे। जब जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया हुई, तो यह सीट महिला आदिवासी वर्ग (अजजा) के लिए आरक्षित हो गई। रामसिंह यादव ने इस मौके को भुनाते हुए जूली आदिवासी को जिला पंचायत सदस्य बनवा दिया। सदस्य बनाए जाने के बाद जब अध्यक्ष बनाने के लिए धन व बाहुबल की बात आई, तो रामसिंह यादव ने अपने कदम पीछे खींच लिए। बकौल वीरेंद्र रघुवंशी के अनुसार उस चुनाव में दूसरी तरफ पिछोर विधायक केपी सिंह थे, इसलिए दादा शायद डर गए और सांसद सिंधिया ने मुझे यह जिम्मेदारी दी कि मैं अध्यक्ष बनवाऊं। शहर सहित जिलेभर को पता है कि जूली आदिवासी शपथ भी पढकऱ नहीं ले पाई थीं, तो रामसिंह दादा की पुत्री मिथलेश यादव ने उनकी मदद की और अपने पीछे-पीछे जूली से शपथ की लाइनें बुलवाईं।
यह दी विधायक महेंद्र ने सफाई
कोलारस विधायक व रामसिंह यादव के पुत्र महेंद्र यादव ने कहा कि जूली व उसका पति मांगीलाल हमारे फार्म हाउस पर 8-10 साल से काम करते थे। हमने उन्हें जिला पंचायत सदस्य बनाया और फिर अध्यक्ष वीरेंद्र रघुवंशी ने बनवाया। किसी भी आदिवासी को जिला पंचायत सदस्य बनाएं या फिर सरपंच, उसे दो-तीन महीने तक मदद करना पड़ती है, फिर वो अपने आप ही चलने लगता है। वीरेंद्र रघुवंशी यदि कह रहे हैं कि उन्होंने छह माह चलाया, तो इतना समय पर्याप्त होता है। हमने उसकी पट्टे की जमीन पर कोई कब्जा नहीं किया, क्योंकि वो जमीन बिक्री से वंचित रहती है। उन्हें शायद यह पता नहीं है कि हमने जूली व उसके पति को एक आदिवासी की जमीन खरीदवाई थी। जबसे भाजपा की सरकार आई है, तब से पंचायती राज के सभी अधिकार छीन लिए और अब तो अधिकारी जिला पंचायत हो या जनपद, वे ही चला रहे हैं।
यह बोले पूर्व विधायक रघुवंशी
जूली को विधायक रामसिंह यादव ने जिला पंचायत सदस्य बनवाया। सांसद सिंधिया के निर्देश पर मैंने केपी सिंह ग्रुप से सीधे टक्कर लेकर जूली को अध्यक्ष बनाया। अध्यक्ष बनाने के 6 माह बाद जूली को मैने रामसिंह यादव के परिवार को ही सौंप दिया था, क्योंकि वो उनके ही फार्महाउस पर काम करती थी। उस समय जूली को दो पट्टे (9-9 बीघा के) हुए थे। तब विधायक व उनके पुत्र ने उस पट्टे की जमीन पर पहले भूमि विकास बैंक के माध्यम से ट्रैक्टर फायनेंस करवाया और फिर किस्त जमा न करके उसी जमीन को बैंक से नीलाम करवाकर खुद ही ने कब्जा कर लिया, क्योंकि बैंक की नीलामी में पट्टे की भूमि विक्रय की जा सकती है। यह सब बातें जूली के पति व खुद जूली ने भी बताई थीं। रामगढ़ गांव में जमीन के सर्वे में पता करके पूरा मामला उजागर हो जाएगा।
Published on:
28 Aug 2018 05:21 pm
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