
MP News : पंजीयन विभाग में 1 अप्रेल से संपदा-1 सॉफ्टवेयर बंद हो जाएगा। इसकी जगह पर संपदा-2 (Sampada 2.0) को पूर्ण रूप से लागू किया जा रहा है। संपदा-2 सॉफ्टवेयर आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआइ) तकनीक पर काम करेगा। इस सॉफ्टवेयर के लागू होने से विभाग में पंजीयन(Land Registry) का तरीका बदल जाएगा। पक्षकारों को रजिस्ट्री का प्रिंट नहीं मिलेगा। पक्षकारों के मोबाइल पर ई रजिस्ट्री पहुंचेगी।
सर्विस प्रोवाइडर के यहां रजिस्ट्री(Land Registry) की प्रक्रिया शुरू होने हर स्टेप पर आधार का ओटीपी लगेगा। ओटीपी के बिना रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। आधार या पैन कार्ड से ही रजिस्ट्री हो सकेगी। यदि आधार या पैनकार्ड नहीं है, तो पक्षकारों के डिजिटल सिग्नेचर बनेंगे। देश व विदेश में कहीं से भी रजिस्ट्री कर सकेंगे। गवाहों की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पंजीयन महानिरीक्षक ने संपदा-2(Sampada 2.0) के लागू किए जाने को लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैं। यदि सेवा प्रदाताओं ने संपदा-1 पर क्रेडिट लिमिट ली है तो वह संपदा-2 में अंतरित नहीं की जाएगी। इसका उपयोग 31 मार्च तक करना होगा। 31 मार्च के बाद संपदा-1 पर स्लॉट भी बुक नहीं कर सकते हैं। क्योंकि यह सॉफ्टवेयर बंद हो जाएगा। संपदा-1 पर बुक स्लॉट की रजिस्ट्री 31 मार्च के बाद नहीं होगी। न ही संपदा-2 पर हस्तांतरित होगी। 31 मार्च तक ई स्टांप का रिफंड लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
● संपत्ति की रजिस्ट्री(Land Registry) कराने में अभी दो गवाहों की जरूरत होती है, लेकिन संपदा-2 में गवाह की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि आधार से नाम व फोटो लिया जाएगा।
● हाउसिंग बोर्ड, उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, एमएसएमई को रजिस्ट्रार के अधिकार मिलेंगे, ताकि प्रॉपर्टी को बैंक में बंधक बनाने में परेशानी न हो।
● एक क्लिक पर संपत्ति की रजिस्ट्री की जानकारी मिल जाएगी। इससे बेनामी संपत्ति पर शिकंजा कसने में मदद मिलेगी। रजिस्ट्री के बाद नगर निगम को मैसेज जाएगा, जिससे नामांतरण आसान होगा। शुल्क की गणना भी होगी।
● साइबर तहसील-2 के तहत शहर में प्लॉट का का भी नामांतरण आसान होगा।
● यदि किसी पक्षकार की रजिस्ट्री हो रही है। रजिस्ट्री का जो लेखन किया गया है, वह डीड संपादित होने से पहले पूरा मेटर पक्षकार के पास मोबाइल या मेल पर पहुंचेगा। वह रजिस्ट्री को पहले खुद पढ़ सकता है।
● वर्तमान में संपत्ति के फोटो अपलोड किए जाते हैं, लेकिन संपदा-2 में गूगल से लोकेशन ली जाएगी। प्रॉपर्टी की आइडी होने से स्टाप शुल्क की चोरी रुकेगी। क्योंकि सेटेलाइट इमेज से संपत्ति की वास्तविक स्थिति दिखेगी। कितने मंजिल मकान बना है या प्लॉट है, सड़क पर है या सड़क से हटकर संपत्ति है।
● संपत्ति के विक्रय में जो फर्जीवाड़ा होता है, उसे भी नहीं बेच पाएंगे। रजिस्ट्री रेकॉर्ड में रहेगी। जैसे ही दूसरे व्यक्ति को रजिस्ट्री की तो संबंधित को पता चल जाएगा।
Updated on:
30 Mar 2025, 11:26 AM IST
Published on:
30 Mar 2025, 11:26 AM IST
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