3 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

माघ चतुर्थी व्रत से होते हैं सारे कष्ट दूर, मिलती हैं खुशियां

भगवान श्री गणेश की आराधना सुख-सौभाग्य प्रदान करने होती है और कष्टों को दूर करने वाली होती है। इस चतुर्थी पर व्रत करके गणेशजी का पूजन करने से सारी विपदाएं दूर होती हैं।

2 min read
Google source verification

image

Gaurav Sen

Jan 15, 2017

lord ganesh sankat chouth

lord ganesh sankat chouth

ग्वालियर। संकष्टी चतुर्थी माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को कहा जाता है। इस चतुर्थी को माघी चतुर्थी या तिल चौथ भी कहते हैं। बारह मास के अनुक्रम में यह सबसे बड़ी चतुर्थी मानी गई है। इस दिन भगवान श्री गणेश की आराधना सुख-सौभाग्य प्रदान करने होती है और कष्टों को दूर करने वाली होती है। इस चतुर्थी पर व्रत करके गणेशजी का पूजन करने से सारी विपदाएं दूर होती हैं।

गणेश भगवान का जन्मदिन भी
शिव रहस्य ग्रंथ के अनुसार आदिदेव भगवान गणेश का जन्म माघ कृष्ण चतुर्थी को ही हुआ था। पूर्वांचल में इस दिन गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन से गणेश दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है। संकष्टी व्रत करने वाले भक्तों पर श्रीगणेश की कृपा बनी रहती है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने वाले श्रद्धालुओं के जीवन के सभी कष्टों का भगवान श्री गणेश निवारण करते हैं।

No automatic alt text available.


शिव का गणेश को वरदान
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार देवता पर आई विपदा के निवारण के लिए मदद मांगने भगवान शिव के पास आए। कार्तिकेय और गणेश भी वहीं बैठे थे। समस्या सुनकर शिवजी ने कार्तिकेय व गणेश से पूछा- तुममें से कौन देवताओं के कष्टों का निवारण कर सकता है। दोनों ने ही स्वयं को इस कार्य के लिए सक्षम बताया। शिव ने कहा- तुम दोनों में से जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके आएगा, वही देवताओं की मदद करने जाएगा। यह सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए। परंतु गणेशजी सोच में पड़ गए कि वह मंद गति ले दौडऩे वाले अपने वाहन चूहे के ऊपर चढ़कर सारी पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे तो इस कार्य में उन्हें बहुत समय लग जाएगा। उन्होंने उपाय लगाया। वे अपने स्थान से उठे और अपने माता-पिता की सात बार परिक्रमा करने वापस बैठ गए। जब परिक्रमा से लौटे कार्तिकेय स्वयं को विजेता बताने लगे। तब शिवजी ने श्री गणेश से पृथ्वी की परिक्रमा ना करने का कारण पूछा। तब गणेश ने कहा- माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक हैं। यह सुनकर भगवान शिव ने गणेशजी को आशीर्वाद दिया कि चतुर्थी के दिन जो तुम्हारा पूजन करेगा और रात्रि में चंद्रमा को अघ्र्य देगा, उनके तीनों ताप दूर होंगे। तभी से गणेशजी भक्तों के कष्टों को दूर करते आ रहे हैं।

ये भी पढ़ें

image