
उपचुनाव का रण : विधानसभा चुनाव से उपचुनाव तक इस सीट पर सिर्फ पार्टी बदली चेहरे वही
ग्वालियर/ मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों में पर होने वाली तारीखों का ऐलान होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दलों के प्रत्याशियों का ऐलान भी हो चुका है। कौन किसके खिलाफ चुनावी मैदान में उतरेगा, तस्वीर बिल्कुल साफ है। सभी राजनीतिक दल जीत की रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं। मध्य प्रदेश में बदले राजनीतिक उथल पुथल के बाद कई सीटों पर मुकाबला रोचक होने जा रहा है। कुछ सीटें तो ऐसी हैं जिनमें चेहरे वही हैं लेकिन पार्टियां बदल गई हैं। उन्हीं में से एक है ग्वालियर पूर्व विधानसभा सीट।
ग्वालियर पूर्व में पार्टी बदली चेहरे वही
इन्ही दिलचस्प सीटों में से एक है ग्वालियर पूर्व, जहां से बीजेपी ने मुन्नालाल गोयल को प्रत्याशी के तौर पर उतारा है। वहीं, कांग्रेस की ओर से इस सीट की कमान सतीश सिकरवार के हाथ में सौंपी है। दिलचस्प बात ये है कि, 2018 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट से मुन्नालाल गोयल कांग्रेस के उम्मीदवार थे और सतीश सिकरवार बीजेपी के उम्मीदवार थे। ऐसे में अब इस सीट पर चुनाव दिलचस्प हो चुका है। अब देखना ये है कि, जनता किसपर भरोसा करेगी।
दिलचस्प पहलू
उम्मीदवारों द्वारा पार्टी बदलकर फिर चुनावी मैदान में खड़े होने की वजह से ग्वालियर पूर्व सीट का चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है। साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान मुन्नालाल गोयल कांग्रेस के उम्मीदवार चुने गए थे। वहीं, सतीश सिकरवार को भाजपा ने उम्मीदवारी देकर उतारा था। तब मुन्ना लाल गोयल ने चुनाव में सतीश सिकरवार को शिकस्त दी थी। लेकिन, मुन्नालाल ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के नेता माने जाते हैं। यही वजह है कि, इसी साल मार्च में उन्होंने सिंधिया के साथ मिलकर बीजेपी का दामन थाम लिया।
पढ़ें ये खास खबर- ओडिशा की तरफ से वापस लौट रहे हैं बादल, जाते जाते फिर भिगाकर जाएगा मानसून
सतीश सिकरवार हुए कांग्रेस में शामिल, मिला टिकट
इधर, मुन्नालाल को टिकट देने से नाराज़ हुए सतीश सिकरवार ने कमलनाथ के हाथ का बोसा लेकर कांग्रेस में शामिल होने को ही समझदारी समझी। लिहाज 2020 उपचुनाव में अब दोनों चेहरे पार्टियां बदलकर फिर आमने-सामने आ गए हैं। सतीश सिकरवार इससे पहले 2015 में कांग्रेस को बड़ा झटका दे चुके हैं। 2015 नगर-निगम चुनाव में सतीश सिकरवार पार्षद का चुनाव निर्विरोध जीत गए थे। उस वक़्त सतीश के समर्थन में कांग्रेस के पार्षद उम्मीदवार ने ही नाम वापस ले लिया था। वहीं, 2013 के विधानसभा चुनाव में जब मुन्नालाल गोयल लगभग जीता हुआ चुनाव हार गए थे, तो उन्होंने बीजेपी की विजयी उम्मीदवार माया सिंह के खिलाफ मतगणना केंद्र के बाहर धरना दे दिया था।
Published on:
08 Oct 2020 10:47 pm

बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
