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एमपी में सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से हाईकोर्ट का इंकार, ग्वालियर खंडपीठ का बड़ा फैसला

Retirement Age in MP - समान काम का तर्क नहीं चला: महिला आयुर्वेद कार्यकर्ताओं की याचिका खारिज, सेवानिवृत्ति की आयु 65 साल करने की मांग की थी

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Gwalior High Court Refuses to Increase Retirement Age in MP

Gwalior High Court Refuses to Increase Retirement Age in MP

Retirement Age in MP - मध्यप्रदेश में विभिन्न सरकारी विभागों में कर्मचारियों, अधिकारियों के रिटायरमेंट की आयुसीमा में अंतर है जिसके कारण विरोधाभाषी स्थिति उत्पन्न होती है। प्रदेश में सेवानिवृत्ति की आयु में एकरूपता की लगातार मांग की जा रही है। हालांकि इस मामले में हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच ने महिला आयुर्वेद स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सेवा आयु 65 वर्ष तक बढ़ाने की मांग को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि केवल समान काम का तर्क देकर नियमों में बदलाव नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने यह फैसला निर्मला तोमर व अन्य की याचिका में सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सेवा निवृत्ति की आयु बढ़ाने का कोई आधार नहीं है।

याचिका में सेवानिवृत्ति की आयु 65 साल करने की मांग की थी

याचिकाकर्ताओं का दावा था कि वे नर्सों की तरह ही कार्य करती हैं, इसलिए उन्हें भी 65 वर्ष तक सेवा का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए समानता की मांग रखी।

हालांकि कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि दोनों पदों में न तो कार्य समान है और न ही योग्यता। नर्स जहां अस्पताल में मरीजों की देखभाल करती हैं, वहीं महिला आयुर्वेद स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भूमिका सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, जागरूकता अभियान, टीकाकरण और पोषण कार्यक्रमों तक सीमित है।

सेवा निवृत्ति की आयु बढ़ाने का कोई आधार नहीं

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा निवृत्ति की आयु फंडामेंटल रूल 56 के तहत तय होती है, जिसमें इन पदों के लिए 62 वर्ष निर्धारित है। जब तक इस नियम को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक आयु बढ़ाने का कोई आधार नहीं बनता।

देश की शीर्ष अदालत भी अहम आदेश दे चुकी

बता दें कि देशभर की तरह मध्यप्रदेश में भी विभिन्न सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों के रिटायरमेंट की आयुसीमा में अंतर है जिसपर जब तब विवाद भी उठते रहे हैं। राज्य के विभिन्न विभागों में सेवानिवृत्ति आयु में एकरूपता की मांग की जाती रही है। मध्यप्रदेश में न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु पर तो देश की शीर्ष अदालत भी अहम आदेश दे चुकी है। मध्यप्रदेश में जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 62 साल करने के लिए सन 2018 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। बाद में एसोसिएशन ने कुछ अन्य राज्यों की तरह 61 वर्ष तक की वृद्धि की बात कही थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एमपी हाइकोर्ट को निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। शीर्ष अदालत ने तब यह भी कहा था कि एमपी के जिला न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 61 वर्ष करने में कोई दिक्कत नहीं है।