भारतीय राजनीति में अटलजी दुर्लभतम राजनेता रहे, जिनका भाषण सुनने कोसों दूर से लोग आया करते थे। चाहे वह संसद हो या कोई चुनावी सभा, उनके शब्द और शैली लोगों के दिलों तक पहुंचती थी। इसकी ट्रेनिंग भी उन्हें गोरखी स्कूल में ही मिल गई थी। कक्षा पांच में जब वे यहां पढ़ते थे, तब एक प्रतियोगिता में उन्हें भाषण देना था। उन्हें कई बार टोका गया। वे माने नहीं पूरा भाषण रटा लेकिन उसी शैली में सुनाया, जिसमें वह सुनाना चाहते थे। ग्वालियर से ही वाद-विवाद की राष्ट्रीय स्पर्धाएं जीतीं।