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घडिय़ाल अभयारण्य की टीम पर आधा सैकड़ा लोगों ने किया पथराव, रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली छुड़ाए

घडिय़ाल अभयारण्य की टीम द्वारा पकड़े रेत से भरे दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को छुड़ाने के लिए गुरुवार दोपहर आधा सैकड़ा लोगों ने टीम पर पथराव कर दिया और दोनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों छुड़ाकर भाग गए।

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घडिय़ाल अभयारण्य की टीम पर आधा सैकड़ा लोगों ने किया पथराव, रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली छुड़ाए

घडिय़ाल अभयारण्य की टीम पर आधा सैकड़ा लोगों ने किया पथराव, रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली छुड़ाए

श्योपुर. घडिय़ाल अभयारण्य की टीम द्वारा पकड़े रेत से भरे दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को छुड़ाने के लिए गुरुवार दोपहर आधा सैकड़ा लोगों ने टीम पर पथराव कर दिया और दोनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों छुड़ाकर भाग गए। मामले में वन अधिनियम के तहत घडिय़ाल अभयारण्य ने प्रकरण दर्ज कर लिया है। वहीं आरोपियों पर कार्रवाई के लिए श्योपुर देहात थाना में भी आवेदन दिया गया।
मामले के अनुसार राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य की टीम वन परिक्षेत्र अधिकारी केएम त्रिपाठी के नेतृत्व में पार्वती नदी किनारे रेत खनन पर कार्रवाई के लिए पहुंची। टीम अपनी गश्त पर थी कि तभी श्योपुर देहात थानांतर्गत पार्वती नदी के पास जलालपुर गांव के नजदीक दो ट्रैक्टर प्रतिबंधित क्षेत्र से अवैध तरीके से परिवहन करते दिखे। जिन्हें पहले टीम के द्वारा रोकने की कोशिश की, लेकिन रेत माफियाओं के दोनों ट्रैक्टर टीम की गाड़ी को कट मारते हुए सीधे जलालपुर गांव में पहुंच गए। जहां पर टीम को पीछा करते हुए देख रेत माफियाओं ने दोनों ट्रैक्टरों रेत से खाली कर दिया और जैसे ही टीम गांव में पहुंची, साथ ही पूछताछ करते हुए दोनों ट्रैक्टरों को जब्त करने के लिए आगे की कार्रवाई शुरू की, वैसे ही आधा किलोमीटर आधा सैंकड़ा लोगों ने एकराय होकर टीम पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस दौरान रैंजर केएम त्रिपाठी के द्वारा देहात थाना प्रभारी को सुरक्षा के लिए लगातार फोन लगाया, लेकिन पुलिस समय पर नहीं पहुंचने के चलते टीम अपनी जान बचाते हुए इधर-उधर छिपे। तब तक रेत माफिया दोनों ट्रैक्टरों को छुड़ाकर भाग गए। जिसमें रेंजर के द्वारा दोनों ट्रैक्टरों के खिलाफ वन्य प्राणी अधिनियम के तहत मामला दर्ज करते हुए पुलिस थाने में भी आवेदन दिया गया है।

वर्जन
हम नियमित गश्त पर थे, तो दो ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत से भरे नजर आए, जो पार्वती नदी से रेत ला रहे थे। हमने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं रुके तो हमने उनका गांव तक पीछा किया। हम उन टै्रक्टरों को पकड़कर थाने ला रहे थे कि आधा सैकड़ा लोगों ने हम पर पथराव कर दिया। हमने थाना प्रभारी को पुलिस बल भेजने को फोन लगाया, लेकिन पुलिस नहीं आई तो हम जान बचाकर वहां से भागे।
केएम त्रिपाठी, रेंज ऑफिसर, चंबल घडिय़ाल अभयारण्य सबलगढ़