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ग्वालियर. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सीने में दाईं ओर दिल (डेक्सट्रोकार्डिया) होने के कारण सीआरपीएफ और असम राइफल्स में कांस्टेबल (जीडी) पद के लिए अनफिट घोषित किए गए उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी है। डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि सेना और अर्धसैनिक बलों की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए मेडिकल बोर्ड का निर्णय ही अंतिम और सर्वोपरि होगा।
याचिकाकर्ता अमित कुमार शर्मा ने वर्ष 2013 में सीआरपीएफ और असम राइफल्स में कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया था। लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मेडिकल परीक्षण में डॉक्टरों ने पाया कि उनका दिल बाईं ओर के बजाय दाईं ओर स्थित है, जिसे डेक्सट्रोकार्डिया कहा जाता है। इसके आधार पर मेडिकल ऑफिसर और बाद में रिव्यू मेडिकल बोर्ड ने उन्हें शारीरिक रूप से अनफिट घोषित कर दिया।
इस फैसले के खिलाफ दायर याचिका सिंगल बेंच से खारिज होने के बाद उन्होंने डिवीजन बेंच में रिट अपील दाखिल की थी। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि डेक्सट्रोकार्डिया कोई बीमारी नहीं है और उम्मीदवार पूरी तरह स्वस्थ है। जीआर मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट ने भी जांच में उसे हर प्रकार की शारीरिक गतिविधि के लिए सक्षम पाया था। ऐसे में मेडिकल बोर्ड द्वारा अयोग्य ठहराया जाना उचित नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि कांस्टेबल का पद वर्दीधारी और अनुशासनात्मक सेवाओं से जुड़ा है। चुनौतीपूर्ण और कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शारीरिक फिटनेस तय करने का अधिकार नियोक्ता और विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड के पास है। सामान्य परिस्थितियों में किसी डॉक्टर या कार्डियोलॉजिस्ट की दी गई रिपोर्ट भर्ती बोर्ड के विशेषज्ञ मेडिकल पैनल के फैसले का स्थान नहीं ले सकती।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह मेडिकल विशेषज्ञों के ऊपर अपनी राय नहीं थोप सकती और न ही इस मामले में अपीलीय प्राधिकारी की तरह कार्य कर सकती है।
Updated on:
01 Sept 2026 06:04 pm
Published on:
01 Sept 2026 06:03 pm
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