
कीटनाशक तक की लिमिट होगी तय
ग्वालियर. ग्वालियर चंबल अंचल के खेतों में अब खेती का तरीका तकनीक के साथ बदलने की तैयारी है। आने वाले समय में खेत में कितनी मात्रा में सीड की जरूरत है, किस क्षेत्रफल में कितना फर्टिलाइजर उपयोग करना है और फसल के लिए कितना पानी पर्याप्त होगा, इसका अनुमान एआइ के जरिए लगाया जा सकेगा। खेती के अलग अलग ऑपरेशंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की दिशा में राजमाता विजयाराजे ङ्क्षसधिया कृषि विश्वविद्यालय ने पहल शुरू की है। इसके तहत किसानों को तकनीक से जोड़ने के साथ विद्यार्थियों को भी एआइ आधारित कृषि तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी। एआइ आधारित सॉफ्टवेयर किसानों और कृषि से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खेत और फसल से जुड़े आंकड़ों के आधार पर तकनीक यह समझने में मदद करेगी कि किस समय किस संसाधन की कितनी आवश्यकता है। भविष्य में मौसम, मिट्टी और फसल की स्थिति जैसे विभिन्न पहलुओं से जुड़े डेटा को भी तकनीक से जोड़कर खेती के निर्णयों को अधिक सटीक बनाया जा सकेगा।
जरूरत के हिसाब से कीटनाशक का उपयोग, स्वास्थ्य पर भी असर
तकनीक के माध्यम से फसल की स्थिति, कीटों और रोगों से जुड़े संकेतों की पहचान कर समय पर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। इससे हर स्थिति में पूरे खेत पर कीटनाशक का छिड़काव करने के बजाय जरूरत वाले हिस्से पर ही जरूरत के अनुसार छिड़काव कर किसान कर सकेंगे। कीटनाशकों का अनावश्यक या अत्यधिक इस्तेमाल कम होने पर मिट्टी, पानी और पर्यावरण पर पड़ने वाले रासायनिक दबाव को घटाने में मदद मिल सकती है।
संसाधनों की बचत करने में मिलेगी मदद
अभी कई बार किसान अनुमान के आधार पर बीज, खाद और पानी का उपयोग करते हैं। ऐसे में कहीं जरूरत से अधिक तो कहीं कम संसाधनों का इस्तेमाल हो जाता है। इसके माध्यम से खेती में संसाधनों के उपयोग को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जाएगा। एआइ आधारित तकनीक खेत के क्षेत्रफल, फसल और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जरूरत का आकलन करने में मदद कर सकती है। इससे संसाधनों की बचत के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
लेबर की कमी में रोबोटिक्स बनेगा मददगार
कृषि क्षेत्र में श्रमिकों की कमी भी लगातार चुनौती बन रही है। ऐसे में भविष्य में रोबोटिक्स को खेती के ऑपरेशंस से जोड़ने पर भी काम किया जाएगा। खेती से जुड़े कुछ कामों में मशीन और रोबोटिक तकनीक का उपयोग किया जा सकेगा। इससे कम श्रम में अधिक काम करने की संभावना बनेगी। खासतौर पर ऐसे कार्य, जिनमें बार बार श्रम की आवश्यकता होती है, उनमें तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।
सितंबर से प्रक्रिया
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अरङ्क्षवद शुक्ला ने बताया एआइ को कृषि से जोड़ने की प्रक्रिया सितंबर से शुरू होने की तैयारी है। इसके लिए विशेषज्ञों की मदद से किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि एआइ आधारित सॉफ्टवेयर और तकनीक का उपयोग खेती में किस तरह किया जा सकता है। साथ ही विद्यार्थियों को भी इससे संबंधित तकनीकी जानकारी दी जाएगी, ताकि कृषि और तकनीक के बीच बेहतर तालमेल तैयार हो सके।
आइआइटी के साथ एमओयू से मिली दिशा…
कृषि में एआइ और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए आइआइटी रोपण के साथ एमओयू किया गया है। इसके माध्यम से तकनीकी विशेषज्ञता को कृषि क्षेत्र तक पहुंचाने का प्रयास होगा। विशेषज्ञ किसानों और विद्यार्थियों को ट्रेङ्क्षनग देंगे व एआइ आधारित खेती के उपयोगों से परिचित कराएंगे।
Updated on:
01 Sept 2026 06:07 pm
Published on:
01 Sept 2026 06:06 pm
