
जियो टैगिंग के जरिए अवैध कॉलोनियों और बिना आइडी वाली संपत्तियों का सर्वे करता नगर निगम अमला।
जियो टैगिंग में खुला अवैध कॉलोनियों का खेल; 76,049 डुप्लीकेट आइडी हटेंगी, 86,840 नई संपत्तियां मिलीं, 30 सितंबर तक पूरा होगा सर्वे
ग्वालियर . शहर की अवैध कॉलोनियों में प्लॉट बेचकर गायब हुए कॉलोनाइजरों का खेल अब नगर निगम की जियो टैगिंग में खुलकर सामने आ रहा है। निगम के सर्वे में 86,840 नई संपत्तियां मिली हैं, जिनकी संपत्ति आइडी पहले निगम के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थी। इनमें बड़ी संख्या अवैध कॉलोनियों में बिके प्लॉटों की है। संपत्ति आइडी नहीं होने के कारण कई प्लॉट खरीदार संपत्तिकर जमा नहीं कर पा रहे हैं और नामांतरण जैसी प्रक्रियाओं में भी परेशानी आ रही है।
नगर निगम अब इन संपत्तियों को टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी कर रहा है। निगम के अनुसार, जिन प्लॉट धारकों ने रजिस्ट्री करा ली है, वे संबंधित टीसी से संपर्क कर अपनी संपत्ति आइडी बनवा सकते हैं। यदि प्लॉट खरीदार सामने नहीं आते हैं तो रजिस्ट्री कराने वाले मूल भू-स्वामी यानी जमीन बेचने वाले किसानों को नोटिस जारी कर संपत्तिकर की वसूली की जाएगी।
नगर निगम सीमा में 2500 से अधिक अवैध कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। इनमें बड़ी संख्या में प्लॉट किसानों के नाम पर रजिस्टर्ड हुए, जबकि सौदे कॉलोनाइजरों के माध्यम से कराए गए। अब अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई शुरू होने के बाद कई कॉलोनाइजर गायब हैं। जियो टैगिंग टीम के सर्वे के दौरान कई प्लॉट खरीदारों ने बताया कि कॉलोनाइजर अब फोन तक नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में खरीदारों के सामने अपनी संपत्ति की आइडी बनवाने और टैक्स जमा करने की समस्या खड़ी हो गई है।
जियो टैगिंग के दौरान निगम के पुराने रिकॉर्ड की गड़बड़ियां भी सामने आई हैं। सर्वे में 76,049 डुप्लीकेट संपत्ति आइडी चिह्नित की गई हैं, जिन्हें हटाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 86,840 नई संपत्तियां रिकॉर्ड में शामिल हुई हैं। निगम का मानना है कि इन नई संपत्तियों को संपत्तिकर के दायरे में लाने से राजस्व में बड़ा इजाफा होगा।
जियो टैगिंग का सर्वे वर्ष 2023 में शुरू किया गया था। ई-नगरपालिका का डाटा चोरी होने और भुगतान में देरी के कारण काम करीब डेढ़ साल प्रभावित रहा। अब 56 वार्डों में सर्वे तेजी से चल रहा है। निगम ने 30 सितंबर तक सभी 66 वार्डों का सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
जियो टैगिंग पूरी होने के बाद संपत्तियों के नामांतरण और संपत्तिकर निर्धारण में भी बदलाव आएगा। भविष्य में टीसी मौके पर पहुंचने के साथ सैटेलाइट मैपिंग के जरिए यह पता कर सकेंगे कि किसी मकान में कितनी मंजिल हैं और उसका वास्तविक क्षेत्रफल कितना है।
इससे कम क्षेत्रफल दर्ज कराकर संपत्तिकर बचाने और फर्जी संपत्ति आइडी के जरिए नामांतरण कराने जैसी गड़बड़ियों पर रोक लग सकेगी। निगम को उम्मीद है कि वास्तविक क्षेत्रफल और निर्माण की जानकारी सामने आने से संपत्तिकर की गणना भी ज्यादा सटीक होगी।
नगर निगम के अनुसार अब तक 41 वार्डों में जियो टैगिंग पूरी हो चुकी है। इनमें से 7 वार्डों का डाटा दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ई-नगरपालिका पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। वहीं 14 वार्डों में दावे-आपत्ति की प्रक्रिया जारी है।
जिन 7 वार्डों का डाटा पोर्टल पर अपलोड किया गया है, वहां संपत्तियों के क्षेत्रफल में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि सामने आई है। इससे इन क्षेत्रों में संपत्तिकर की राशि भी बढ़ने की संभावना है।
पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने नगर निगम को 150 करोड़ रुपए संपत्तिकर वसूली का लक्ष्य दिया था। निगम ने इसके मुकाबले 116 करोड़ रुपए ही वसूल किए। इस वित्तीय वर्ष में लक्ष्य बढ़ाकर करीब 175 करोड़ रुपए कर दिया गया है। अब तक निगम करीब 42.31 करोड़ रुपए संपत्तिकर वसूल कर चुका है।
जियो टैगिंग में सामने आए सभी प्लॉटों को संपत्तिकर के दायरे में लाया जाएगा। अवैध कॉलोनियों के जिन प्लॉटों की आइडी नहीं बनी है, उनके भूमि स्वामियों को नोटिस दिए जाएंगे। जिन प्लॉट धारकों ने रजिस्ट्री करा ली है, वे टीसी से संपर्क कर अपनी आइडी बनवा सकते हैं और संपत्तिकर जमा कर सकते हैं। डुप्लीकेट आइडी हटाई जाएंगी और जिन संपत्तियों का क्षेत्रफल कम दर्ज है, उनसे सही क्षेत्रफल के आधार पर टैक्स लिया जाएगा। सही गणना से संपत्तिकर बढ़ेगा और गड़बड़ियों पर भी रोक लगेगी।
— मुनीष सिकरवार, अपर आयुक्त, नगर निगम
Updated on:
30 Aug 2026 07:08 pm
Published on:
30 Aug 2026 07:07 pm
